Ranchi: जो राष्ट्र अपने नायकों को स्मरण रखता है, वही उद्देश्य और गर्व के साथ आगे बढ़ता है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए, वीर बिरसा मुंडा साइक्लोथॉन ने औरंगाबाद में विश्राम के उपरांत छठे दिन अपनी यात्रा पुनः आरंभ की। नव ऊर्जा, अनुशासन और राष्ट्रीय उत्साह से ओतप्रोत यह साइक्लोथॉन शौर्य के कदम, क्रांति की ओर का प्रेरणादायी संदेश लेकर आगे बढ़ा। औरंगाबाद से साइक्लोथॉन को एक गरिमामय एवं प्रभावशाली समारोह में माननीय श्री दिलीप सिंह, एमएलसी, औरंगाबाद द्वारा औपचारिक रूप से रवाना किया गया। इस अवसर पर कर्नल प्रदीप तक्षक, कमांडिंग ऑफिसर, 13 बिहार बटालियन एनसीसी, एनसीसी कैडेट्स एवं अन्य गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
औरंगाबाद में विश्राम दिवस की शुरुआत कर्नल अनिल कुमार, टीम लीडर द्वारा संचालित योग एवं वेलनेस सत्र से हुई, जिसका उद्देश्य शारीरिक सहनशक्ति, मानसिक दृढ़ता तथा टीम भावना को सुदृढ़ करना था। इस सत्र में सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः के शाश्वत आदर्श पर विशेष बल दिया गया, जिसने सामूहिक कल्याण की भावना को सुदृढ़ किया तथा महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी वीर बिरसा मुंडा की प्रेरणादायी विरासत और सर्वोच्च बलिदान को स्मरण कराया। इसके उपरांत साइक्लोथॉन दल ने ऐतिहासिक देव सूर्य मंदिर का भ्रमण किया, जो भगवान सूर्य को समर्पित भारत के अत्यंत पूजनीय सूर्य मंदिरों में से एक है। इसका पवित्र जलकुंड और उत्कृष्ट नक्काशीदार पत्थर शिल्प इसकी गहन ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्ता का साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं। शांत एवं दिव्य वातावरण ने साइकिल चालकों को एक आध्यात्मिक रूप से समृद्ध अनुभव प्रदान किया।
ऊर्जावान एवं दृढ़ संकल्पित होकर साइक्लोथॉन दल ने बिहार के सासाराम की ओर लगभग 60 किलोमीटर की अगली यात्रा प्रारंभ की। मार्ग में दल ने श्रद्धेय माँ तारा चंडी मंदिर में श्रद्धांजलि अर्पित की, जिससे उनका सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक जुड़ाव और भी प्रगाढ़ हुआ। सासाराम पहुँचने पर साइक्लोथॉन दल का 42 बिहार बटालियन एनसीसी, एनसीसी कैडेट्स एवं विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में भव्य एवं उत्साहपूर्ण स्वागत किया गया। जनसमुदाय की अत्यंत सकारात्मक प्रतिक्रिया और हार्दिक स्वागत ने दल को विशेष रूप से प्रेरित किया तथा साइक्लोथॉन के महान उद्देश्य के प्रति व्यापक जनसमर्थन की पुनः पुष्टि की। छठे दिन की गतिविधियाँ अनुशासन, एकता, सांस्कृतिक गौरव एवं राष्ट्रीय चेतना का सशक्त प्रतिबिंब रहीं—जो कि वीर बिरसा मुंडा साइक्लोथॉन की पहचान हैं। सासाराम में रात्रि विश्राम के पश्चात, साइक्लोथॉन सातवें दिन अपनी यात्रा पुनः आरंभ करते हुए आध्यात्मिक एवं सुंदर नगरी वाराणसी की ओर प्रस्थान करेगा।
