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Home»राज्य»झारखंड»विश्व स्ट्रोक दिवस पर भगवान महावीर मणिपाल हॉस्पिटल की अपील: स्ट्रोक के लक्षण पहचानें और समय पर इलाज कराएं
झारखंड

विश्व स्ट्रोक दिवस पर भगवान महावीर मणिपाल हॉस्पिटल की अपील: स्ट्रोक के लक्षण पहचानें और समय पर इलाज कराएं

avnpostBy avnpostOctober 28, 2026No Comments4 Mins Read
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रांची: प्रत्येक वर्ष 29 अक्टूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम “हर मिनट महत्वपूर्ण है” को ध्यान में रखते हुए भगवान महावीर मणिपाल हॉस्पिटल, रांची ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें डॉक्टरों ने स्ट्रोक के लक्षणों को समय पर पहचानने और बिना देर किए इलाज शुरू करने की जरूरत बताई। उन्होंने समझाया कि स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर तुरंत हॉस्पिटल पहुंचना चाहिए, क्योंकि इलाज में देरी से मरीज की हालत गंभीर हो सकती है।
इस चर्चा में न्यूरोलॉजी के कंसल्टेंट डॉ दीपक चंद्र प्रकाश और न्यूरोलॉजी व मूवमेंट डिसऑर्डर के कंसल्टेंट डॉ रोहित केशव शामिल हुए। इनके साथ न्यूरोसर्जरी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ अमित कुमार और डॉ विक्रम सिंह, इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के एचओडी और कंसल्टेंट डॉ रोहित कुमार सेंगर और क्रिटिकल केयर के चेयरमैन डॉ. विजय कुमार मिश्रा भी मौजूद रहे। उन्होंने स्ट्रोक से जुड़ी जरूरी बातें साझा कीं। उन्होंने बताया कि स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानकर मरीज को जल्द हॉस्पिटल पहुंचाना और सही समय पर इलाज देना बहुत जरूरी है। साथ ही, उन्होंने इलाज में तालमेल यानि मरीज की बेहतर देखभाल के लिए अलग-अलग विभागों के डॉक्टरों के मिलकर काम करने की भूमिका के बारे में भी बताया।
स्ट्रोक तब पड़ता है, जब दिमाग तक खून पहुंचना बंद हो जाता है या दिमाग में खून बहने लगता है। इससे व्यक्ति को चलने, बोलने, देखने और शरीर का संतुलन बनाए रखने में परेशानी हो सकती है। स्ट्रोक के लक्षण पहचानने के लिए ‘बी फास्ट’ तरीका अपनाया जाता है। इसके तहत कुछ खास लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है, जैसे शरीर का संतुलन बिगड़ना, दिखाई देने में परेशानी होना, चेहरे का एक तरफ लटक जाना, हाथ में कमजोरी आना और बोलने में दिक्कत होना। इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देने पर तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए और मरीज को हॉस्पिटल पहुंचाना चाहिए। स्ट्रोक में समय पर इलाज मिलना बहुत जरूरी है। ‘गोल्डन आवर’ यानि शुरुआती समय में इलाज मिलने से मरीज को गंभीर नुकसान से बचाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इलाज का तरीका स्ट्रोक के प्रकार और मरीज की हालत पर निर्भर करता है। इसलिए लक्षण दिखते ही देर किए बिना हॉस्पिटल जाना चाहिए।
स्ट्रोक के इलाज में कई तरह के डॉक्टरों और मेडिकल टीम की जरूरत होती है। मरीज की हालत के हिसाब से अलग-अलग चरणों में जांच और इलाज किया जाता है। न्यूरोलॉजी के डॉक्टर दिमाग की स्थिति की जांच करते हैं और दवाओं से इलाज करते हैं। वहीं, न्यूरोसर्जरी के डॉक्टर यह देखते हैं कि मरीज को ऑपरेशन की जरूरत है या नहीं। कुछ मरीजों में दिमाग की नस में फंसे खून के थक्के को निकालने के लिए मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी नामक खास प्रक्रिया की जाती है। यह इलाज कुछ खास मरीजों में ही संभव होता है। जो न्यूरो-इंटरवेंशनल विशेषज्ञ द्वारा होता है।इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर की टीम मरीज की हालत पर लगातार नजर रखती है, ताकि किसी भी परेशानी का समय रहते पता लगाकर तुरंत इलाज किया जा सके। स्ट्रोक का सही इलाज तय करने के लिए डॉक्टर सीटी स्कैन या एमआरआई जैसी जांच करते हैं। इससे पता चलता है कि स्ट्रोक किस तरह का है और मरीज को किस इलाज की जरूरत है। अगर इस्केमिक स्ट्रोक यानी दिमाग की नस में खून का थक्का जमने से स्ट्रोक हुआ है, तो मरीज की हालत के अनुसार थक्का घोलने की दवा दी जा सकती है या उसे निकालने की मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी प्रक्रिया की जा सकती है। इलाज के बाद मरीज को दोबारा चलने-फिरने, बोलने और रोजमर्रा के काम करने में मदद के लिए फिजियोथेरेपी और दूसरी तरह की रिहैबिलिटेशन की जरूरत भी पड़ सकती है।
भगवान महावीर मणिपाल हॉस्पिटल, रांची के डायरेक्टर मनोज रॉय ने कहा कि विश्व स्ट्रोक दिवस के मौके पर हमारा मकसद रांची के लोगों को स्ट्रोक के लक्षणों के बारे में जागरूक करना है। लोगों को यह समझना जरूरी है कि स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर बिना देर किए मरीज को हॉस्पिटल पहुंचाना चाहिए। बी फास्ट का नजरिया अपनाकर स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को तुरंत पहचाना जा सकता है। लेकिन सिर्फ लक्षण पहचानना ही काफी नहीं है, समय पर इलाज कराना भी बहुत जरूरी है। स्ट्रोक के बेहतर इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम का मिलकर काम करना और मरीज को सही समय पर इलाज मिलना जरूरी है। लोगों में जागरूकता बढ़ाकर और समय पर मेडिकल मदद देकर मरीज को जल्द इलाज दिलाने में मदद मिल सकती है। इस पहल का मकसद लोगों को स्ट्रोक के लक्षणों के बारे में जागरूक करना, लक्षण दिखते ही तुरंत कदम उठाने और सही समय पर इलाज लेने के बारे में जानकारी देना है।

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