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Home»राजनीति»स्मॉग से आजादी की मांग वाजिब
राजनीति

स्मॉग से आजादी की मांग वाजिब

avnpostBy avnpostNovember 17, 2025No Comments4 Mins Read
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देश की राजधानी दिल्ली की हवा बहुत खराब हो गयी है। इसे लेकर 09 नवम्बर को इंडिया गेट के समक्ष ‘स्मॉग से आजादी’ जैसे पोस्टर के साथ विरोध प्रदर्शन हुआ। जवाब में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। इस आलोक में सोशल मीडिया पर हिटलर के बनाये गैस चेम्बर को याद करते हुए लोगों ने लिखा…’इसका विरोध करेंगे, तो सजा मिलेगी ही।’ इस तरह की टिप्पणी सत्ता के लिए चेतावनी है। यहां लोगों ने लोकतंत्र की बुनियाद पर सरकार बनायी थी। लेकिन, अनुभूति तानाशाही की हुई, तो अब नाराजगी दिख रही है। इंडिया गेट के समक्ष हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या युवाओं की थी। इन्होंने विरोध किया, तो दिल्ली की भाजपा सरकार को इसमें राष्ट्र-विरोधी भावनाओं की बू आने लगी। भाजपा आरोप लगाती है कि राहुल गांधी देश में अस्थिरता लाने के लिए युवाओं को आगे कर रहे हैं। जबकि, दिल्ली का प्रदूषण सर्वविदित है और इसे लेकर ही युवाओं का गुस्सा भड़का था। गौरतलब है कि दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 370 के स्तर पर पहुंच गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। नेशनल कैपिटल रीजन (एनसीआर) में भी हालात ऐसे ही हैं। नोएडा, गुड़गांव, फरीदाबाद, गाजियाबाद ; सब दमघोंटू हवा में कैद हैं। नवम्बर के आरम्भ से नाइट्रोजन डाइआॅक्साइड (एनओ2) का स्तर अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर पहुंच गया है, जो सीधे फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहा है। ऐसे में हवा साफ करने के सघन उपायों के बजाय कभी क्लाउड सीडिंग से नकली बारिश, कहीं कुछ क्षेत्रों में पानी का छिड़काव जैसे ऊपरी उपाय किये जा रहे हैं। इस कार्य में जनता के पैसे की बर्बादी तो है, राहत नाममात्र की भी नहीं। सरकार को इस बात पर आपत्ति है कि जब धरना-प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर का स्थान तय किया गया है, तो इंडिया गेट पर लोग प्रदर्शन के लिए क्यों पहुंचे। प्रदर्शन शांतिपूर्ण था। केवल नारे और तख्तियों के साथ बच्चे, बूढ़े, जवान ; सभी एकत्र हुए थे, ताकि सरकार को बता सकें कि इस समय सांस लेना उनके लिए कितना दूभर हो गया है। फिर भी दिल्ली पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों ने दंगा नियंत्रण गियर में पहुंच कर कई प्रदर्शनकारी युवकों को हिरासत में ले लिया। इसे कानून व्यवस्था का मामला बताते हुए पुलिस ने कार्रवाई की। सरकार की विफलता का इससे बड़ा प्रमाण दूसरा क्या होगा कि उसे धरना-प्रदर्शन कहां हो रहा है, इससे तकलीफ है; इस बात से सरोकार नहीं है कि आखिर लोगों को प्रदूषण के खिलाफ आवाज उठाने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ा। इंडिया गेट पर एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘यह हेल्थ इमरजेंसी है, न कि दोषारोपण का खेल। ट्रायल-एंड-एरर से हमारा भविष्य बर्बाद हो चुका है। सरकार को अब साफ हवा की नीति तुरन्त लागू करनी चाहिए।’ एक अन्य ने कहा, ‘अमीर लोग एयर प्यूरीफायर खरीद सकते हैं या पहाड़ों पर भाग सकते हैं, लेकिन हम कहां जायें? हर सर्दी में सांस लेने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। हवा सरकारी नहीं, सबकी है।’ वायु प्रदूषण कितना घातक हो चुका है, यह बात प्रदर्शन में शामिल एक डॉक्टर के बयान से समझी जा सकती है। उन्होंने कहा, ‘दिल्ली में हर तीसरा बच्चा फेफड़ों की क्षति का शिकार है। वे साफ हवा वाले बच्चों से लगभग 10 वर्ष कम जीते हैं। लम्बे समय तक प्रदूषण से हृदय रोग, स्ट्रोक और अस्थमा होता है। यह गर्भ से शुरू होकर बुढ़ापे तक पीछा करता है।’ नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी पर कड़ी आपत्ति जतायी है। उन्होंने कहा है, ‘स्वच्छ हवा का अधिकार एक बुनियादी मानवाधिकार है। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार हमारे संविधान द्वारा सुनिश्चित किया गया है। शांतिपूर्ण ढंग से स्वच्छ हवा की मांग करनेवाले नागरिकों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार सरासर गलत है।’ राहुल गांधी की इस बात को राजनैतिक विचारधारा और दलगत राजनीति से ऊपर उठ कर देखने-समझने की जरूरत है। वायु प्रदूषण किसी पर यह देख कर असर नहीं करता कि किसने किस दल को वोट दिया है। जीवित रहने के लिए सांस लेना अत्यन्त आवश्यक है और सांस तभी ठीक से चल सकती है, जब उसे प्रदूषण रहित स्वच्छ हवा मिले।

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