उत्तरी गोवा के नाइट क्लब में आग लगी और देखते-देखते 25 लोग मौत के आगोश में समा गये। व्यवस्था की लापरवाही इन सभी को लील गयी। संकरे रास्ते, नियमों की अनदेखी और अवैध निर्माण के कारण यह हादसा हुआ। ऐसी घटनाएं पर्यटन को भी नुकसान पहुंचाती हैं। जितनी तत्परता अब दिखलाई जा रही है, यदि ऐसी संजीदगी नियमों का पालन करने और कराने में दिखलाई गयी होती, तो इस हादसे से बचा जा सकता था। नाइट क्लब में 06 दिसम्बर की आधी रात को जब आग लगी, तब यह लगभग पूरी तरह भरा हुआ था। वीकेंड मनाने आये लोग अचानक ही लपटों और धुएं के बीच फंस गये। ऐसी अफरा-तफरी मची कि कई लोगों को बाहर निकलने का रास्ता ही नहीं मिला। यदि लापरवाहियों की सूची निकाली जाये, तो बहुत लम्बी हो जायेगी। नाइट क्लब तक पहुंचने का रास्ता इतना संकरा था कि फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को 400 मीटर दूर खड़ा होना पड़ा। सजावट के लिए ताड़ के सूखे पत्तों का उपयोग किया गया था, जिसने आग और भड़का दी। भीड़भाड़ वाली जगहों पर एंट्री से अधिक महत्त्वपूर्ण इमरजेंसी एग्जिट पॉइंट्स होते हैं, लेकिन इस क्लब में लगता है कि इसकी भी कोई व्यवस्था नहीं थी। इस कारण कई लोग भटक कर किचन में पहुंच गये, जहां से बाहर निकलने का रास्ता नहीं था। जैसी कि जानकारी मिली है, यह नाइटक्लब बिना मंजूरी के चल रहा था। लोकल अथॉरिटी की मानें, तो यह निर्माण ही अवैध था। बहरहाल, जांच जारी है। इसमें कई अनियमितताएं व नियमों का उल्लंघन सामने आये, तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। सुरक्षा मानकों को लेकर यह लापरवाही आम है ; खासकर फायर सेफ्टी को लेकर। 2025 के ही मई महीने में हैदराबाद के गुलजार हौज इलाके में एक आवासीय बिल्डिंग में आग लगी थी। इस घटना में 17 लोगों की मौत हो गयी थी। वहां भी हताहतों की संख्या अधिक होने के पीछे यही वजह निकली…संकरे रास्ते और वेंटिलेशन का अभाव। अब सभी क्लबों की जांच करने की बात की जा रही है। अच्छी बात है, लेकिन इसके लिए किसी हादसे का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए। मानकों और सुरक्षा उपायों की रेगुलर चेकिंग अथॉरिटीज की जिम्मेदारी है। बिना लाइसेंस चल रहे क्लब, होटल अथवा रेस्तरां को बंद कराने के साथ यह जानना भी आवश्यक है कि आखिर ये खुल कैसे जाते हैं और फिर कैसे धड़ल्ले से चलते रहते हैं। गोवा के जीडीपी में पर्यटन का हिस्सा 16 प्रतिशत से अधिक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष जनवरी से सितम्बर के बीच 6.23 प्रतिशत अधिक टूरिस्ट गोवा पहुंचे। ऐसे में यह घटना राज्य की अच्छी छवि पेश नहीं करती। यहां तो पहले ही टैक्सी चालकों की मनमानी और पर्यटकों के साथ अभद्रता की समस्या रही है। ऐसे में राज्य सरकार को इन मामलों को ध्यान में रखते हुए इस तरह के उपाय करने चाहिए, जिनसे भविष्य में ऐसी कोई घटना न हो। उत्तरी गोवा के नाइट क्लब की घटना अत्यन्त हृदयविदारक है। 25 लोगों की जिस तरह मृत्यु हुई, वह बहुत ही पीड़ादायक है।
