पश्चिमी सिंहभूम। जिला स्थित सोनुवा प्रखंड के गोबिंदपुर पंचायत अंतर्गत पुनीपदा गांव में शनिवार को ग्रामीणों ने हो समाज के प्राकृतिक आस्था स्थल देशाऊली में गैर आदिवासियों के कथित धार्मिक अतिक्रमण और छेड़छाड़ के विरोध में आक्रोश बैठक आयोजित की।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ गैर आदिवासी समुदाय के लोग, विशेष रूप से कुम्हार और प्रधान समाज के सदस्य, देशाऊली स्थल के वृक्षों पर लाल और पीले रंग के कपड़े बांध रहे हैं और वहां सूता लपेटकर धार्मिक प्रतीक स्थापित कर रहे हैं। इसके अलावा शाम के समय असामाजिक तत्व देशाऊली परिसर को शराब और बीड़ी-सिगरेट सेवन का अड्डा बना रहे हैं, जिससे स्थल की पवित्रता भंग हो रही है।
इस घटना के विरोध में आयोजित बैठक में आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा के पदाधिकारी भी उपस्थित थे। बैठक के बाद ग्रामीणों और महासभा के सदस्यों ने देशाऊली स्थल का निरीक्षण किया और वहां लगाए गए लाल-पीले कपड़े तथा सूता को हटा दिया।
आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा के राष्ट्रीय महासचिव गब्बर सिंह हेम्ब्रम ने कहा कि देशाऊली जैसे प्राकृतिक आस्था स्थलों की सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी स्वयं ग्रामीणों की है। उन्होंने कहा कि किसी भी गैर आदिवासी सहित अन्य धर्मावलंबी के धार्मिक हस्तक्षेप से स्थल की पवित्रता भंग होगी, जो सामाजिक रूप से अस्वीकार्य है।
उन्होंने ग्रामीणों को सुझाव दिया कि इस घटना के खिलाफ वे चक्रधरपुर के एसडीओ, अंचल के सीओ और थाना प्रभारी को लिखित शिकायत सौंपें और देशाऊली स्थल पर गैर आदिवासियों के प्रवेश पर रोक लगाई जाए।
बैठक में ग्रामीणों ने देशाऊली की सुरक्षा को लेकर तत्परता दिखाते हुए अस्थायी रूप से बांस की घेराबंदी करने का निर्णय लिया। साथ ही जानकारी दी गई कि सरकारी योजना के तहत देशाऊली स्थल की चारदीवारी निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन आपसी समन्वय की कमी के कारण कार्य में प्रगति नहीं हो पाई है।
इस अवसर पर आदिवासी हो समाज युवा महासभा के जिला सचिव ओयबन हेम्ब्रम, हो भाषा शिक्षक रामधन चाकी, ग्रामीण मुण्डा जॉन अंगरिया, राजू होनहागा, सदन होनहागा, राम होनहागा, दामोदर गागराई, गुलशन गागराई, स्मामलाल गागराई, सालुका गागराई, मधुसुदन होनहागा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
