रांची। केंद्र सरकार की ओर से देश में लागू किए गए श्रम संहिता की ऑल इंडिया सेंट्रल कॉन्सिल की ऑफ ट्रेड यूनियन्स (एक्टू) ने कड़ी निंदा की है। एक्टूू के झारखंड के सचिव भुवनेश्वर केवट ने शनिवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि केंद्र सरकार की चार श्रम संहिता केंद्र के अडियल रवैये को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि चार श्रम संहिता देश के मजदूर वर्ग के लिए काले कोड के समान हैं। इसके खिलाफ एक्टू अन्य केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा के साथ मिलकर 26 नवंबर को प्रदर्शन के माध्यम से कड़ा विरोध प्रदर्शन करेगा। केवट ने कहा कि 21 नवंबर देश के मजदूर मेहनतकश वर्ग के लिए काला दिवस के रूप में याद किया जाएगा। चार श्रम संहिता पूरी तरह से मजदूरों को गुलाम बनाने वाला दस्तावेज है। इसके खिलाफ लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक केंद्र सरकार से चारों श्रम संहिताओं को रद्द कर सभी पुराने श्रम कानूनों को लागू नहीं करती है।
उन्होंने कहा कि श्रम कानूनों में संशोधन पूरी तरह मालिकों के पक्ष में किया गया है। यह मजदूर वर्ग के साथ विश्वासघात है। अर्थव्यवस्था में वृद्धि और आत्मनिर्भर भारत के लिए पूंजीपतियों को छूट देकर मजदूर वर्ग को बलि का बकरा बनाना सरासर अनुचित है। केंद्र सरकार को इस फैसले की कीमत चुकानी पड़ेगी या विवश होकर जीएसटी की तरह ही संशोधन कर मजदूरों के पक्ष में फैसले लेना पड़ेगा।
