रांची : माननीय न्यायामूर्ति-सह-कार्यपालक अध्यक्ष झालसा श्री सुजीत नारायण प्रसाद के दिशा निर्देश पर, माननीय सदस्य सचिव झालसा कुमारी रंजना अस्थाना एवं माननीय न्यायायुक्त-सह-अध्यक्ष श्री अनिल कुमार मिश्रा-1 के मार्गदर्शन में डालसा सचिव श्री राकेश रौशन की उपस्थिति में आज दिनांक 18.04.2026 को छोटानागपुर लॉ कॉलेज, रांची में छात्र-छात्राओं के लिए ‘डॉन अभियान’ के तहत नशा मुक्ति पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डिप्टी एलएडीसी, राजेश कुमार सिन्हा, सहायक एलएडीसी श्री पंकज कुमार शर्मा, एनसीबी के श्री शारिक उमर, श्री संजीत, एसिस्टेंट डायरेक्टर श्री गौरव सिंह, सीआईडी के श्री रिजवान, लाइफ सेवर्स एनजीओ के प्रमुख, श्री अतुल गेरा, छोटानागपुर लॉ कॉलेज के शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राएं, पीएलवी तारा मिंज, विनोद कच्छप, राजा वर्मा एवं अन्य उपस्थित थे।
राजेश कुमार सिन्हा ने भारतीय संविधान का अनुच्छेद 47 पर फोकस किये। उन्होंने कहा कि अफीम या पोस्ता के उत्पादन या कब्ज़े पर एनडीपीएस अधिनियम 1985 के तहत मात्रा के आधार पर 20 साल तक के कठोर कारावास एवं 2 लाख रूपये के जुर्माने की सजा हो सकती है। बार-बार अपराध करने पर मृत्युदंड तक दिया जा सकता है। काँके स्थित पुनर्वास केंद्रों के साथ-साथ एनजीओ भी नशा करने वालों को ठीक करने में मदद करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि सीआईपी और रिनपास में जिला विधिक सेवा प्राधिकार का लिगल एड क्लिनिक है, जहां नशा करनेवाले व्यक्तियों को ईलाज किया जाता है। श्री सिन्हा ने आगे नशा से संबंधित पदार्थों के बारे एवं सजा के प्रावधानों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों का तस्करी करने, रखने, एक जगह से दूसरे जगह ले जाने, किसी व्यक्ति के पास पाये जाने पर वह एनडीपीएस कानून के तहत सजा के भागी होंगे। श्री सिन्हा ने नालसा टॉल फ्री नम्बर 15100 पर फोकस किया।
अतुल गेरा ने कहा कि नशा हमारे देश को खोखला कर रहा है। नशा से बचने के लिए छात्र-छात्राओं को जागरूक करना आवश्यक है। नशा के पेडलर नवयुवक एवं छात्रों को इस व्यवसाय में आसानी से उपयोग करते है, जिससे हमलोगों को सचेत रहना है और किसी भी तरह का ड्रग्स पेडलरों के द्वारा दिये जा रहे लालच में न आये। नशा से तन-मन-धन की हानि होती है। नशा के आदि लोग अंततः अपराध की ओर चले जाते है।
एनसीबी के संजीत कुमार ने कहा कि झारखंड में इस नशे की समस्या को रोकने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की भूमिका महत्वपूर्ण है। यह क़ानूनों के कार्यान्वयन और हितधारकों के बीच समन्वय के लिए ज़िम्मेदार है। नशे की दवाओं का उत्पादन और वितरण इस समस्या की जड़ तक पहुँचता है। अधिकांश तस्करी के गिरोह संसाधनों की कमी के कारण पकड़े नहीं जाते। गृह मंत्रालय ने पिछले महीने मादक द्रव्यों के सेवन से संबंधित किसी भी संदेह की जानकारी देने के लिए आम जनता के लिए मानस हेल्पलाइन (टोल फ्री नं. 1933) स्थापित की है।
