सतना। भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी शनिवार को अपने बचपन की यादों में लौट आए, जब वे करीब 55 साल बाद सतना के सरस्वती हायर सेकेंडरी स्कूल पहुंचे। जैसे ही वे विद्यालय परिसर में प्रवेश किए, पूरा वातावरण गर्व और भावनाओं से भर उठा। बच्चों, शिक्षकों और शहरवासियों ने फूलों और तालियों से उनका आत्मीय स्वागत किया। मंच पर पहुंचते ही पूरा प्रांगण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। जनरल द्विवेदी ने मुस्कुराते हुए कहा, यही विद्यालय मेरी ताकत का आधार बना। यहीं मैंने जीवन की दिशा तय करना और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेना सीखा। राष्ट्र सेवा पर बल देते हुए उन्होंने कहा, हर नागरिक को देश के प्रति अपना कर्तव्य निभाना चाहिए – चाहे वह सेना में हो या किसी अन्य क्षेत्र में। भारत हमारा घर है, इसे विकसित बनाने की जिम्मेदारी हम सबकी है। जब हर भारतीय सेवा भाव से काम करेगा, तभी 2047 तक भारत एक विकसित राष्ट्र बनेगा। सम्मान समारोह में विद्यालय परिवार, पूर्व छात्र, शिक्षकों और शहर के गणमान्य नागरिकों की बड़ी संख्या मौजूद रही। विद्यालय ने गर्व के साथ अपने पूर्व छात्र का सम्मान किया। जिन गलियों में कभी जनरल द्विवेदी ने बचपन में खेला था, वही रास्ते अब देश के थल सेना प्रमुख के स्वागत में सजे थे। पूरा परिसर भावनाओं, देशभक्ति और गौरव से ओतप्रोत हो उठा। उन्होंने बताया कि 1971-72 में वे इसी स्कूल की चौथी कक्षा में पढ़ते थे। भावुक होते हुए उन्होंने कहा, “यह स्थान मेरे व्यक्तित्व की नींव है, जिसने मेरे भीतर राष्ट्र सेवा का संकल्प जगाया। आज मैं जो भी हूँ, उसमें इस विद्यालय का बहुत बड़ा योगदान है। अपने संबोधन में जनरल द्विवेदी ने हाल ही में चर्चा में आए ऑपरेशन सिंदूर का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि न्याय और मानवता की रक्षा के लिए लड़ा गया धर्म युद्ध था। उन्होंने कहा, “हमारे मिशन की पहली प्राथमिकता थी कि निर्दोषों को कोई नुकसान न हो। हमने कभी भी प्रार्थना या नमाज के समय हमला नहीं किया। हर कदम पर हमने धर्म और मर्यादा का पालन किया। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत की सेना युद्ध में भी नीति, धर्म और अनुशासन का पालन करती है। छात्रों से संवाद के दौरान उन्होंने सफलता के लिए दृष्टिकोण , अनुकूलनशीलता और क्षमता पर जोर दिया। कहा,सकारात्मक दृष्टिकोण हर मुश्किल को आसान बना देता है, अनुकूलनशीलता व्यक्ति को हर परिस्थिति में टिके रहने की ताकत देती है, और क्षमता ही उसे बाकी सबसे अलग बनाती है। कड़ी मेहनत और अनुशासन आपका सबसे बड़ा साथी है। आज का विद्यार्थी ही कल का राष्ट्र निर्माता है। लगन और ईमानदारी से काम करेंगे, तो आने वाले भारत की दिशा आप तय करेंगे।
