जामिया उम्मे हबीबा लिलबानात द्वारा जलसा सीरतुन्नबी का आयोजन
रांची: हमें घर-घर शिक्षा का दीप जलाना है, बच्चों, बड़ों को पढ़ाना है और सबको कुरान की शिक्षा देनी है। याद रखें कि शिक्षा ग्रहण की कोई उम्र सीमा नहीं होती। उक्त विचार झारखंड सरकार के शहर काजी और मदीना मस्जिद हिंदपीढ़ी रांची के इमाम व खतीब हजरत मौलाना कारी अंसारुल्लाह कासमी ने जामिया उम्मे हबीबा लिलबानात कांके नगड़ी द्वारा नगड़ी जामा मस्जिद में आयोजित जलसा सीरतुन्नबी को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हमारे घरों का माहौल धार्मिक होना चाहिए, हमारे रिश्ते-नाते शरीयत और सुन्नत के अनुसार होने चाहिए, हमें अपने बच्चों और युवाओं पर ध्यान देना चाहिए। जामिया उम्मे हबीबा लिलबानात लड़कियों की शिक्षा के प्रति चिंतित है। हमें इसे मजबूत करने की आवश्यकता है। हर क्षेत्र के लोगों की यह जिम्मेदारी है कि वे अपने क्षेत्र की मस्जिद, मदरसा और उलेमा की रक्षा और अच्छे कार्यों का सराहना करें। लड़कियों के बीच धार्मिक शिक्षा समय की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। सभा को संबोधित करते हुए मौलाना मुकर्रम उप निदेशक मदरसा आलिया कांके ने हजरत मुहम्मद मुस्तफा के जीवन के विभिन्न पहलुओं के उदाहरणों और घटनाओं से अवगत कराया और कहा कि इस्लाम धर्म हमें जन्म से लेकर मृत्यु तक जीवन के हर पड़ाव पर मार्गदर्शन करता है। इसके अलावा मौलाना शफीउल्लाह कासमी ने बड़ी शालीनता के साथ संचालन किया। जलसा के आयोजक और जामिया उम्मे हबीबा लिलबानात के निदेशक हजरत मौलाना कारी रमजान रशीदी ने उलेमा और अन्य अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। बैठक में हजरत मौलाना कारी अंसारुल्लाह कासमी, हजरत कारी रमजान रशीदी, कारी इनामुल हक, हाफिज हारून रशीद, मौलाना शफीउल्लाह कासमी, मुफ्ती अतीकुर्रहमान कासमी, हाफिज इम्तियाज, हाफिज अजीज, समाज सेवी ऐनुल हक अंसारी, जमील अंसारी, हाजी रफीक, हसीब अंसारी, हाफिज अब्दुल हसीब, मौलाना मुकर्रम, मौलाना मुजफ्फर, मौलाना महमूद, अताउल्लाह रहबर, आबिद हुसैन, जमील अख्तर, मौलाना नूरुल्लाह कासमी, पत्रकार आदिल रशीद समेत अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।
