रांची, : मेदांता अब्दुर्रज्जाक अंसारी मेमोरियल वीवर्स हाॅस्पिटल, रांची में सांस लेने में भीषण तकलीफ से जूझ रही तीसरी बार गर्भवती हुई 24 साल की महिला कंचन कुमारी को हाॅस्पिटल के इंटरवेंशनल कार्डियोलाॅजिस्ट डाॅ. विनीत कुमार ने जोखिम भरी मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया से हृदय के वाल्व को फैलाकर महिला तथा पेट में पल रहे बच्चे की जान बचाई। दो बार लगातार गर्भपात झेल चुकी महिला साढ़े सात माह की गर्भवती थी। गर्भावस्था में इस तरह की सर्जरी काफी जोखिम भरी होती है जिसमें मां और बच्चा दोनों की जान जाने का खतरा बना रहता है। आॅपरेशन के बाद महिला स्वस्थ है और अपना सारा काम कर रही है।
डाॅ. विनीत ने बताया कि वह हाट फेल्योर के साथ यहां आयी थी। उसका बी.पी. काफी लो था, फेफड़े की नस पर काफी दबाव था। इसे गंभीर पाल्मोनरी अट्रियल हाइपरटेंशन कहा जाता है। उसके हृदय का वाल्व सिकुड़ गया था। उन्होंने कहा कि पहले उसे विभिन्न प्रकार की दवा देकर उसकी स्थिति को स्थिर किया गया। इसके बाद पैर की नस से बैलून द्वारा उसके वाल्व को फैलाया गया। इस प्रक्रिया से न सिर्फ महिला बल्कि उसके जन्म लेने वाले बच्चे की भी जान बच गयी। गर्भावस्था में हृदय को अन्य अवस्था से ज्यादा काम करना पड़ता है, लेकिन वाल्व के सिकुड़ जाने से हार्ट फेल्योर का खतरा काफी बढ़ जाता है जो महिला तथा पेट में पल रहे बच्चे दोनों के लिए जानलेवा हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की जोखिम भरी गर्भावस्था में तुरंत इलाज की जरूरत पड़ती है जो मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया ने पूरी कर दी। डाॅक्टर बताते है कि महिला तथा पेट में पल रहा बच्चा दोनो ठीक है। आशा की जाती है कि महिला सफलतापूर्वक बच्चे को अगले महीने जन्म दे सकेगी।
हाॅस्पिटल के डायरेक्टर श्री विश्वजीत कुमार ने कह कि गर्भावस्था में महिला के हृदय का वाल्व सिकुड़ना काफी गंभीर होता है, पर यहां अपने-अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ डाॅक्टर और सुविधाएं मौजूद हैं जिससे जोखिम भरी प्रक्रिया भी पूरी की जाती है। उन्होंने कहा कि हाॅस्पिटल के डाॅक्टर मरीजों के इलाज के लिए सदैव तत्पर और तैयार रहते हैं। हमारे हाॅस्पिटल में बीमारियों की जांच तथा इलाज के लिए विभिन्न तरह की अत्याधुनिक मशीनें, उपकरण और सुविधाएं उपलब्ध हैं जिससे डाॅक्टरों को मरीज का इलाज करने में काफी सहूलियत मिलती है।
