रांची: माननीय सर्वोच्च न्यायालय में चल रहे समाधान समारोह-2026 (विशेष लोक अदालत) को लेकर माननीय झालसा के द्वारा कुल 116 वादों को डीएलएसए, रांची को मध्यस्थता हेतु दिया गया था। यह सभी वाद माननीय सर्वोच्च न्यायालय में लंबित थे। सर्वोच्च न्यायालय में चल रहे समाधान समारोह-2026 के तत्वावधान में माननीय न्यायमूर्ति-सह-कार्यपालक अध्यक्ष, झालसा श्री सुजीत नारायण प्रसाद के दिशा-निर्देश पर एवं माननीय सदस्य सचिव झालसा, कुमारी रंजना अस्थाना एवं माननीय न्यायायुक्त, रांची श्री अनिल कुमार मिश्रा-1 के मार्गदर्शन में तथा डालसा सचिव श्री राकेश रौशन के नेतृत्व में कुल 116 मामलों की मध्यस्थता डीएलएसए, रांची में करायी गयी। इन सभी मामलों में डीएलएसए, रांची के द्वारा दोनों पक्षों को नोटिस भेजकर मध्यस्थता वर्चुअल एवं फिजिकल मोड में करायी गयी, जिसमें कुल 10 मामलों को रांची डीएलएसए के माध्यम से सुलह कराया गया।
उन्हीं मामलो में एक मामला जो लगभग 50 वर्ष पुराना मामला था और वह 2019 से सुप्रीम कोर्ट में वाद संख्या सी.ए. 4061/2019 दी स्टैट आॅफ झारखण्ड एंड अदर्स एवं कमीश्नर आॅफ कमर्शियल टेक्सेस बनाम मेसर्स टाटा स्टील लिमिटेड के विरूद्ध उपरोक्त वाद लंबित चल रहा था। उक्त वाद को माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समाधान समारोह (विशेष लोक अदालत) हेतु चिन्हित कर माननीय झालसा के द्वारा मध्यस्थता केंद्र, रांची में भेजा गया था। यह वाद वर्ष 1977-78 में काॅमर्शिलय टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा 68,39,946 का पेनल्टी मेसर्स टाटा स्टील पर किया था। टाटा स्टील लिमिटेड द्वारा उक्त पेनल्टी के विरूद्ध 25,00,000 रूपये जमा कर माननीय उच्च न्यायालय में अपील किया था और माननीय उच्च न्यायालय द्वारा काॅमर्शियल टैक्सेस के पेनल्टी आदेष को निरस्त कर दिया गया था। जिसके विरूद्ध पुनः काॅमर्शिलय टेक्सेस डिपार्टमेंट, झारखण्ड द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में अपील दायर किया गया था, जो वर्षों से उच्चतम न्यायालय में लंबित था।
मध्यस्थता के दौरान मध्यस्थता द्वारा दोनों पक्षों के बीच करीब 10 बैठकें की गयी और अंततः झारखण्ड सरकार की तरफ से काॅमर्षिलय टेक्सेस डिपार्टमेंट के नाॅडल आॅफिसर एसिस्टेंट कमिश्नर संजय प्रसाद द्वारा प्रस्तावित झारखण्ड कर समाधान योजना-2026 के अनुपालन के आलोक में टाटा स्टील के विधि विभाग के पदाधिकारी श्री विकास मित्तल एवं आकर्षण कुमार के बीच आपसी विचार-विमर्श और समझौता के उपरांत 25,00,000 रूपये के भुगतान के उपरांत शेष राशि की पांच प्रतिशत राशि का भुगतान 30 दिनों के अंदर काॅमर्शियल डिपार्टमेंट को करने की सहमति बनी और दोनों पक्ष आपसी सहमति से वर्षों पुराने विवाद को समाप्त किया। इसके अलावा श्री पंचानन सिंह के द्वारा वाद संख्या-डायरी नम्बर-41558/2025, एसएलपी (सीआर) नम्बर – 17522/2026 को भी सुलझा लिया गया।
तत्पष्चात् दिनांक 21.08.2026 को संबंधित मध्यस्थ, पक्षकार एवं डालसा सचिव राकेष रौषन मानीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष वर्चुअल मोड में उपस्थित होकर मामलों का निष्पादन कराया। यह भी ज्ञात हो कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आयोजित समाधान समारोह-2026 (विशेष लोक अदालत) में वरीय मध्यस्थ सुश्री मनिषा रानी के द्वारा भूमि विवाद से संबंधित वाद संख्या – सी.ए.1194-1195/2015, श्री प्रकाश चंद्र उरांव के द्वारा वाद संख्या-डायरी नम्बर-9892/2024, (सीआरए) नम्बर – 4647/2024, मध्यस्थ श्री राजीव मोदी के द्वारा वैवाहिक वाद संख्या-डायरी नम्बर – 50318/2025, एसएलपी नम्बर-10569/2026, मध्यस्थ श्रीमति कुमारी शिला के द्वारा वैवाहिक वाद संख्या-डायरी नम्बर-1692/2026, एसएलपी नम्बर-10569/2026 को सुलझा लिया गया। माननीय न्यायायुक्त-सह-अध्यक्ष, श्री अनिल कुमार मिश्रा-1 ने समाधान समारोह-2026 के तहत वादों के निस्तरण पर दोनों पक्षों को बधाई दी।
