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Home»स्वास्थय»पारस एचईसी हॉस्पिटल में बिना चीर-फाड़ के गॉलब्लैडर और आंत के कैंसर का सफल इलाज
स्वास्थय

पारस एचईसी हॉस्पिटल में बिना चीर-फाड़ के गॉलब्लैडर और आंत के कैंसर का सफल इलाज

avnpostBy avnpostOctober 10, 2025No Comments2 Mins Read
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डुओडनल और बाइलरी स्टेंटिंग तकनीक से मरीजों को मिली राहत

रांची: हाल के वर्षों में गॉलब्लैडर (पित्ताशय) और आंत के कैंसर के मामले तेजी से बढ़े हैं। इन कैंसरों में मरीजों को अक्सर दो प्रमुख समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इनमें आहार मार्ग में रुकावट और पित्त नली में रुकावट। जब तक इन रुकावटों को दूर नहीं किया जाता, तब तक कैंसर का आगे का उपचार जैसे कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी संभव नहीं हो पाता। अब पारस एचईसी हॉस्पिटल, रांची में इन दोनों रुकावटों का सफल इलाज बिना किसी सर्जरी या चीर-फाड़ के किया जा रहा है। यह प्रक्रिया स्टेंट के माध्यम से की जाती है, जिसे डुओडनल स्टेंटिंग कहा जाता है। पिछले छह महीनों में अस्पताल में चार मरीजों का सफलतापूर्वक डुओडनल स्टेंटिंग किया जा चुका है।
पारस एचईसी हॉस्पिटल, रांची के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के ब्रिगेडियर डॉ आलोक चंद्रा ने कहा कि कैंसर के मरीजों में रुकावट एक बड़ी समस्या होती है। जब आहार या पित्त मार्ग अवरुद्ध हो जाता है, तो मरीज न तो भोजन कर पाते हैं और न ही कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी आगे बढ़ पाती है। डुओडनल और बाइलरी स्टेंटिंग जैसी आधुनिक तकनीक से हम बिना चीर-फाड़ के इन रुकावटों को दूर कर मरीजों की जीवन गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार ला रहे हैं। डुओडनल स्टेंटिंग एक न्यूनतम इनवेसिव (बिना सर्जरी वाली) प्रक्रिया है जिसमें एक पतली नली (स्टेंट) को आहार मार्ग या पित्त नली में डाला जाता है ताकि रुकावट को खोला जा सके और भोजन या पित्त का प्रवाह सामान्य हो सके।
डॉ चंद्रा ने कहा कि इस प्रक्रिया में प्लास्टिक या मेटल स्टेंट का उपयोग किया जाता है। प्लास्टिक स्टेंट लगभग 3 महीने तक प्रभावी रहता है। मेटल स्टेंट 1.5 से 2 साल तक कायम रहता है। पारस हॉस्पिटल की यह पहल उन कैंसर पीड़ित मरीजों के लिए राहत का संदेश है जो रुकावट की समस्या के कारण आगे का उपचार नहीं करा पाते थे। अब वे अपना इलाज करवा सकते हैं, बल्कि आगे की कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी भी सुगमता से करवा सकते हैं।
पारस हॉस्पिटल के फैसिलिटी निदेशक डॉक्टर नीतेश कुमार ने कहा कि पारस हॉस्पिटल में आयुष्मान भारत योजना और राज्य सरकार के स्वास्थ्य योजना के लाभार्थियों का इलाज किया जा रहा है। कैंसर के मरीज यहां सरकार के स्वास्थ्य योजना के तहत इलाज करवा सकते हैं। एक ही छत के नीचे कैंसर से जुड़ी सभी बीमारियों का इलाज अनुभवी डॉक्टरों के द्वारा किया जा रहा है।

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