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Home»देश»आईएएस को केवल नौकरी नहीं, संविधान और राष्ट्र के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता मानें: ओम बिरला
देश

आईएएस को केवल नौकरी नहीं, संविधान और राष्ट्र के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता मानें: ओम बिरला

avnpostBy avnpostJune 10, 2026No Comments2 Mins Read
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नई दिल्ली । लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को 2024 बैच के आईएएस प्रशिक्षु अधिकारियों से भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) को केवल एक पेशा नहीं, बल्कि संविधान, राष्ट्र और नागरिकों के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता के रूप में देखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शासन की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि कानूनों और नीतियों को जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है। संसद भवन में लोकसभा सचिवालय के संसदीय लोकतंत्र के लिए अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान (प्राइड) द्वारा आयोजित सहायक सचिव कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए बिरला ने कहा कि लोक सेवक परिवर्तन के वाहक होते हैं और नागरिकों की आकांक्षाओं को वास्तविक परिणामों में बदलने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
उन्होंने कहा कि संसद केवल कानून बनाने का मंच नहीं है, बल्कि देश की जनता की आकांक्षाओं, अपेक्षाओं और चिंताओं की सर्वोच्च अभिव्यक्ति भी है। संसद के साथ जुड़ाव अधिकारियों को लोकतांत्रिक शासन, विधायी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को निकट से समझने का अवसर प्रदान करता है। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि किसी भी कानून का वास्तविक मूल्य उसके प्रभावी क्रियान्वयन में निहित होता है। संसद कानून बनाती है, लेकिन प्रशासनिक तंत्र ही विधायी मंशा को नागरिकों के लिए ठोस परिणामों में बदलता है। निर्वाचित प्रतिनिधि जनता की उम्मीदों को आवाज देते हैं, जबकि प्रशासक नीतियों, योजनाओं और बेहतर सेवा वितरण के माध्यम से उन उम्मीदों को साकार करते हैं।
बिरला ने प्रशिक्षु अधिकारियों को जनता से निरंतर जुड़े रहने और भारत की सामाजिक, सांस्कृतिक तथा भौगोलिक विविधता को समझने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि एक प्रशासक के लिए कानूनों और नियमों का ज्ञान जितना जरूरी है, उतनी ही महत्वपूर्ण संवेदनशीलता, सहानुभूति और स्थानीय परिस्थितियों की समझ भी है। स्थानीय भाषाओं में संवाद करने और लोगों की समस्याओं को समझने वाले अधिकारी अधिक प्रभावी ढंग से जनविश्वास अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने सिविल सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि उनका योगदान देशभर में शासन व्यवस्था को मजबूत बना रहा है। बिरला ने ईमानदारी, करुणा, जवाबदेही और जनसेवा के प्रति समर्पण को प्रत्येक सिविल सेवक के लिए अनिवार्य गुण बताया।

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