Ranchi:नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर बरियातु स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस आवासीय विद्यालय में श्रद्धा, सम्मान और प्रेरणा से ओत-प्रोत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन शामिल हुए।
विद्यालय परिसर में आगमन के उपरांत उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री, वरीय पुलिस अधीक्षक श्री राकेश रंजन एवं जिला शिक्षा अधीक्षक श्री बादल राज ने मां सरस्वती की पूजा-अर्चना कर विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की। इसके पश्चात उपायुक्त, वरीय पुलिस अधीक्षक, जिला शिक्षा अधीक्षक, विद्यालय के प्राचार्य एवं छात्र-छात्राओं द्वारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर सभी ने नेताजी के आदर्शों को आत्मसात करने और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का व्यक्तित्व अत्यंत दृढ़ और प्रेरणादायी था। कठिन परिस्थितियों में विदेश सेवा जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा उत्तीर्ण करने के बावजूद उन्होंने देश की आज़ादी को अपना सर्वाेच्च लक्ष्य बनाया और पद से त्यागपत्र देकर स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। आज़ाद हिंद फौज की स्थापना कर उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष किया और देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। नेताजी का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जिससे हमें राष्ट्र और समाज के लिए कुछ करने की सीख मिलती है।
उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा विद्यालय के छात्रावास का निरीक्षण भी किया गया। निरीक्षण के दौरान रसोईघर, आवासीय कक्ष, कॉरिडोर, स्नानागार एवं शौचालय सहित अन्य सुविधाओं का जायजा लेते हुए उन्होंने जिला शिक्षा अधीक्षक को छात्रावास के समग्र अपग्रेडेशन हेतु आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छात्रावास की सुविधाओं में किसी प्रकार की कमी न रहे, यह जिला प्रशासन की प्राथमिकता है।
उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने बताया कि विद्यालय में वर्तमान में 157 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, जिनमें 9 ऐसे बच्चे हैं जिनके माता-पिता नहीं हैं। उन्होंने संवेदनशीलता के साथ कहा कि ऐसे बच्चों को स्वयं को अकेला नहीं समझना चाहिए। यदि उनके जैविक माता-पिता नहीं हैं, तो विद्यालय के शिक्षक ही उनके अभिभावक हैं। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों की समुचित देखभाल और मार्गदर्शन करने को कहा तथा भरोसा दिलाया कि जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार सदैव उनके साथ खड़ी है।
