रांची : मुंह का कैंसर अक्सर ऐसे हल्के लक्षणों से शुरू होता है, जिन्हें आसानी से नजरअंदाज कर दिया जाता है। मुंह में ऐसा घाव जो ठीक न हो, कोई असामान्य दाग या पैच दिखाई देना, या ऐसा जख्म जो दो हफ्ते से ज्यादा समय तक बना रहे, शुरुआत में मामूली लग सकता है। लेकिन ये किसी गंभीर बीमारी के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। अपने नए जागरूकता अभियान ‘टालो मत, पहचानो’ के जरिए भारत के प्रमुख निजी मल्टी-स्पेशियलिटी टर्शियरी और क्वाटरनरी केयर प्रदाताओं में से एक, मेदांता, लोगों को इन संकेतों को समय रहते पहचानने के लिए जागरूक कर रहा है। इस अभियान का उद्घाटन श्री राम टहल चौधरी, पूर्व एमपी, रांची,
श्री राकेश तिवारी, स्टेट हेड, अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन प्रोफेसर गोपाल पाठख, डायरेक्टर जेनरल, सरला बिरला यूनिवर्सिटी , मेदांता हॉस्पिटल रांची के हॉस्पिटल डायरेक्टर विश्वजीत कुमार और सैयद अंसारी ने किया। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को समय पर डॉक्टर से सलाह लेने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि इन लक्षणों को नजरअंदाज करने या इलाज में देरी से बचा जा सके।
भारत में हर साल करीब 1.4 लाख लोगों में मुंह के कैंसर की पहचान होती है। यानी हर दिन लगभग 400 लोग इस बीमारी से प्रभावित होते हैं। ‘टालो मत, पहचानो’ अभियान में मुंह के कैंसर से जुड़े प्रमुख रिस्क (जोखिमों) के बारे में बताया गया है। इनमें तंबाकू चबाना, धूम्रपान और शराब का सेवन शामिल है। इसके अलावा मुंह के घाव, दांतों का नुकीला होना और सही फिटिंग वाले नकली दांत न होना भी इसके जोखिम को बढ़ा सकते हैं।इस पहल के तहत, मेदांता हॉस्पिटल रांची में एक इंटरैक्टिव ओरल कैंसर जागरूकता जोन बनाया है। यहां लोगों को जागरूक करने वाली मटेरियल दी गई है, जिससे वे अपने मुंह के कैंसर के जोखिम को समझ सकें।
डॉ. नरेश त्रेहन, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, मेदांता, ने कहा, “स्वास्थ्य संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे लोगों को स्वास्थ्य के बारे में जागरूक करें और इसे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाएं। मुंह का कोई घाव या छाला अगर दो हफ्ते या उससे ज़्यादा समय तक ठीक न हो, तो यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। डॉ. अन्ने श्रीकांत , सीनियर कंसलटेंट एंड एच.ओ.द. मेडिकल ऑनकोलॉजी कैंसर केयर, मेदांता रांची , ने कहा, “मुंह के कैंसर की पहचान अक्सर नहीं होती है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षणों को लोग आसानी से नजरअंदाज कर देते हैं। मेदांता में हम रोज देखते हैं कि समय पर इलाज शुरू करने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं, इलाज का बोझ कम हो सकता है और जीवन बेहतर बनी रह सकती है।
