चंद्रा पंचायत, ओरमांझी : ग्राम पंचायत चंद्रा, प्रखंड ओरमांझी के चंद्रा गांव में ग्रामीणों ने सामूहिक श्रमदान के माध्यम से जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की। गांव के बहेड़ा कुट क्षेत्र में ग्रामीणों ने मिलकर लूज बोल्डर स्ट्रक्चर (LBS) का निर्माण किया। इस पहल का उद्देश्य बारिश के दौरान छोटी घाटी/नाले से बहकर निकल जाने वाले पानी को रोकना और उसे गांव के आसपास संरक्षित करना है।
इस सामुदायिक कार्य को सफल बनाने में पिरामल फाउंडेशन की गांधी फेलो काकली भंडारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपने को-फेलो सचिन के सहयोग से ग्रामीणों के साथ संवाद कर जल संरक्षण एवं स्थानीय स्तर पर वर्षाजल को रोकने की आवश्यकता पर चर्चा की और श्रमदान के माध्यम से लूज बोल्डर स्ट्रक्चर निर्माण की पहल को आगे बढ़ाया।
इस सामुदायिक कार्य का नेतृत्व पूर्व मुखिया रमेश चंद्र उरांव, ग्राम प्रधान रंजीत पाहन तथा वार्ड सदस्य जेठू मुंडा ने किया। उनके साथ बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने श्रमदान कर संरचना के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाई।
ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि गांव से होकर बहने वाले वर्षाजल को यथासंभव गांव में ही रोका जाएगा। इसके लिए स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे जल संरक्षण ढांचे तैयार किए जाएंगे, ताकि वर्षा के पानी का संरक्षण हो सके, भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद मिले और आने वाले समय में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
गांधी फेलो काकोली भंडारी ने बताया कि स्थानीय समुदाय की भागीदारी के बिना जल संरक्षण के प्रयासों को स्थायी रूप देना संभव नहीं है। इसी सोच के साथ ग्रामीणों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित करने और स्थानीय संसाधनों के उपयोग से छोटे जल संरक्षण ढांचे विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि “पानी को बहने देने के बजाय गांव में रोकना और उसका संरक्षण करना ही जल सुरक्षा की दिशा में पहला कदम है।” इसी सोच के साथ ग्रामीणों ने चंद्रा पंचायत के प्रत्येक गांव को जल की दृष्टि से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सामुदायिक प्रयास शुरू किया है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य चंद्रा पंचायत के प्रत्येक गांव को जल पर्याप्त (Water Sufficient) बनाना है। ग्रामीणों की सामूहिक भागीदारी, श्रमदान और स्थानीय नेतृत्व से यह पहल न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा दे रही है, बल्कि गांवों में सामुदायिक एकजुटता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत कर रही है।
