रांची । तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जल संकट और प्रदूषण की चुनौतियों के बीच CREDAI रांची चैप्टर द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित बिल्डर्स वर्कशॉप में प्रकृति आधारित अपशिष्ट जल प्रबंधन (Nature-Based Wastewater Management) और सतत शहरी विकास पर व्यापक चर्चा हुई। कार्यशाला में EMERGY Enviro Private Limited (SINE-IIT Bombay) के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री इंद्रकांत झा ने “इंटीग्रेटेड वेटलैंड टेक्नोलॉजी (IWT) आधारित ग्रीन एसटीपी तथा N-Treat (इन-सीटू नाला ट्रीटमेंट)” विषय पर विशेष व्याख्यान दिया।
अपने संबोधन में श्री झा ने कहा कि भविष्य के “Water Sensitive Cities” के निर्माण के लिए पारंपरिक ऊर्जा-प्रधान सीवेज ट्रीटमेंट प्रणालियों से आगे बढ़कर प्रकृति आधारित, कम ऊर्जा खपत वाली तथा पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि IIT बॉम्बे द्वारा विकसित Integrated Wetland Technology (IWT) जैविक एवं प्राकृतिक प्रक्रियाओं के माध्यम से सीवेज का प्रभावी उपचार करती है, जिससे ऊर्जा की खपत, कार्बन उत्सर्जन और परिचालन लागत में उल्लेखनीय कमी आती है। साथ ही उपचारित जल का उपयोग बागवानी, फ्लशिंग, भू-जल पुनर्भरण तथा अन्य गैर-पेय उपयोगों में किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि IWT आधारित ग्रीन STP की प्रमुख विशेषताओं में न्यूनतम विद्युत खपत, कम रखरखाव, अत्यल्प स्लज उत्पादन, बिना दुर्गंध एवं मच्छरों के संचालन, गुरुत्वाकर्षण आधारित प्रवाह प्रणाली तथा 90–95 प्रतिशत भूमि के पुनः उपयोग की क्षमता शामिल है। यह तकनीक आवासीय टाउनशिप, स्मार्ट सिटी, औद्योगिक परिसर, संस्थानों तथा नगर निकायों के लिए एक दीर्घकालिक एवं आर्थिक रूप से व्यवहार्य विकल्प बनकर उभर रही है।
श्री झा ने N-Treat तकनीक का भी विस्तार से परिचय देते हुए बताया कि यह खुली नालियों में ही अपशिष्ट जल का उपचार करने वाली विकेन्द्रीकृत (Decentralized) प्रणाली है, जिससे प्रदूषित जल को नदियों एवं अन्य जल स्रोतों में जाने से पहले ही प्रभावी रूप से उपचारित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक सीमित भूमि, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और पारंपरिक सीवरेज नेटवर्क के अभाव वाले क्षेत्रों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई है तथा देश के अनेक शहरों में इसके सफल परिणाम प्राप्त हुए हैं।
