रांची। महिला अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक के हालिया घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सोनाल शांति ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक के गिरने से भाजपा नेताओं को मानसिक आघात पहुंचा है, जिसके चलते वे अनर्गल आरोप लगा रहे हैं।
सोनाल शांति ने भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि भाजपा महिला आरक्षण विधेयक को एक ढाल के रूप में इस्तेमाल कर अपने परिसीमन (Delimitation) के एजेंडे को लागू करना चाहती थी। लेकिन विपक्ष की एकजुटता के कारण भाजपा का यह प्रयास विफल हो गया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं को विधानसभा और संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला विधेयक वर्ष 2023 में ही संसद में विपक्ष की सहमति से पारित हो चुका है। इसके बावजूद, भाजपा सरकार ने 2024 के लोकसभा चुनाव में इसे लागू नहीं किया, जो उनकी नीयत पर सवाल खड़े करता है।
सोनाल शांति ने कहा कि यदि केंद्र सरकार चाहती, तो 543 सीटों वाली वर्तमान लोकसभा में ही महिलाओं को आरक्षण देकर लगभग 180 महिला सांसदों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सकती थी। लेकिन ऐसा नहीं किया गया, क्योंकि भाजपा और उससे जुड़े संगठनों की सोच महिला सशक्तिकरण के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने जानबूझकर इस विधेयक को जनगणना और परिसीमन से जोड़कर 2029 तक टालने की रणनीति अपनाई। अब जबकि यह विधेयक कानून का रूप ले चुका है और राष्ट्रपति की मंजूरी भी प्राप्त कर चुका है, तो उसमें संशोधन का प्रयास सरकार की मंशा पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के नाम पर भाजपा अपने परिसीमन विधेयक को पारित कराना चाहती थी। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि भाजपा की नीयत साफ है, तो वह 2023 में पारित कानून के अनुसार तत्काल महिलाओं को आरक्षण लागू कर आगामी चुनाव कराए।
उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन के माध्यम से भाजपा उत्तर और दक्षिण भारत के बीच राजनीतिक असमानता पैदा करने की कोशिश कर रही है, जिसे कांग्रेस ने देश के सामने उजागर किया है।
