रांची। चतरा जिले के टंडवा स्थित मगध और आम्रपाली कोयला परियोजनाओं से जुड़े बहुचर्चित टेरर फंडिंग मामले में आरोपित अनिश्चय गंझू को फिलहाल राहत नहीं मिली है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने मंगलवार को उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। अनिश्चय गंझू चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र का निवासी है और वह पिछले लगभग छह वर्षों से जेल में बंद है।
दरअसल, अनिश्चय गंझू को 6 जून 2020 को गिरफ्तार किया गया था। उसके खिलाफ आरोप है कि वह प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) के लिए कोयला खनन क्षेत्रों से अवैध रूप से धन संग्रह करने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार, उसने अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर टीपीसी के नाम पर दहशत फैलाकर स्थानीय व्यापारियों, ठेकेदारों और कारोबारियों से लेवी वसूली की थी। एनआईए की जांच में यह भी सामने आया था कि मगध और आम्रपाली कोयला परियोजनाओं से जुड़े क्षेत्रों में उग्रवादी संगठन के लिए जबरन वसूली के जरिए बड़ी मात्रा में धन जुटाया जा रहा था। इस धन का इस्तेमाल संगठन की गतिविधियों को संचालित करने और उसके नेटवर्क को मजबूत करने में किया जाता था।
इस मामले में सबसे पहले टंडवा थाना में कांड संख्या 2/16 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एनआईए को सौंप दी गई। एनआईए ने अपने स्तर पर मामला दर्ज कर विस्तृत अनुसंधान शुरू किया था, जिसमें कई लोगों की संलिप्तता सामने आई। इस मामले में कई अन्य आरोपितों को पहले ही ऊपरी अदालतों से जमानत मिल चुकी है। इनमें सुदेश केडिया, संजय जैन, महेश अग्रवाल, अजय कुमार, अजीत कुमार ठाकुर और सुभान मियां सहित अन्य नाम शामिल हैं। हालांकि, विशेष एनआईए अदालत ने अनिश्चय गंझू के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों और मामले की गंभीरता को देखते हुए उसकी जमानत याचिका स्वीकार करने से इनकार कर दिया। मामले की सुनवाई के दौरान एनआईए ने अदालत को बताया कि आरोपित की भूमिका टेरर फंडिंग नेटवर्क में महत्वपूर्ण रही है और उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने ज़मानत याचिका खारिज कर दी।
