रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ के बावजूद रूस के साथ तेल व्यापार पर भारत के रुख का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि भारत ऐसे मामलों में अपने फैसले लेने में पूरी तरह सक्षम है। लावरोव ने भारत के ‘आत्मविश्वास’ की सराहना करते हुए भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर की सराहना की।
लावरोव ने कहा कि जयशंकर के साथ अपनी नियमित बातचीत में, वह कभी भी तेल और व्यापार का मुद्दा नहीं उठाते क्योंकि भारत ये फैसले खुद लेने में पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी टैरिफ का भारत-रूस संबंधों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
इस बीच, लावरोव ने जयशंकर के एक बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर अमेरिका तेल बेचना चाहता है, तो भारत अपनी शर्तों पर बातचीत करेगा, लेकिन भारत रूस या अन्य देशों से क्या खरीदता है, यह उसका अपना मामला है और इसका भारत-अमेरिका एजेंडे से कोई लेना-देना नहीं है। लावरोव ने इस प्रतिक्रिया को बिल्कुल सही बताया और कहा कि यह स्पष्ट है कि भारत का तुर्की जितना ही सम्मान और आदर है।
दरअसल, रूसी विदेश मंत्री लावरोव संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने इस बात की भी पुष्टि की कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस साल दिसंबर में भारत आने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने भारत-रूस संबंधों की मजबूती पर ज़ोर दिया और कहा कि दोनों देशों का द्विपक्षीय एजेंडा बहुत व्यापक है।
रूसी विदेश मंत्री का यह समर्थन ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता चल रही है और ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया है। इस टैरिफ में 25% अतिरिक्त टैरिफ रूस के साथ तेल व्यापार के कारण लगाया गया है।
लावरोव ने कहा कि भारत और रूस के बीच संबंध कोई साधारण साझेदारी नहीं, बल्कि एक विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और रूस के बीच लगातार बातचीत हो रही है और विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस साल रूस का दौरा करेंगे, जबकि उनका खुद भारत आने का कार्यक्रम है।
