रांची। आज सोमवार को अबुआ अधिकार मंच के सदस्यों ने मंच के कोऑर्डिनेटर ऑफ़ स्टूडेंट्स अफेयर्स अभिषेक शुक्ला के नेतृत्व में सैकड़ों छात्र-छात्राओं के साथ रांची विश्वविद्यालय में हो रही वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए विश्वविद्यालय के फाइनेंशियल एडवाइजर अजय कुमार का घेराव कर प्रदर्शन किया।
लगभग दो घंटे चले इस प्रदर्शन के दौरान जैसे ही छात्र-छात्राएं फाइनेंशियल एडवाइजर के चेंबर में पहुंचे, वे वहीं धरने पर बैठ गए और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर जोरदार नारेबाजी की।
अभिषेक शुक्ला ने फाइनेंशियल एडवाइजर से पूछा कि विश्वविद्यालय प्रशासन प्रतिवर्ष 8 से 9 करोड़ रुपये का घाटा सहन करके NCCF से कार्य क्यों करा रहा है, जबकि यही परीक्षा विभाग पूर्व में रांची विश्वविद्यालय को प्रतिवर्ष 2 करोड़ रुपये का मुनाफा देता था। इस पर फाइनेंशियल एडवाइजर ने बताया कि झारखंड के सभी विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार से उन्होंने NCCF कंपनी के दस्तावेज मांगे हैं। दस्तावेज उपलब्ध होने पर तथा सभी मानकों की समीक्षा के बाद NCCF पर कार्रवाई की जाएगी।
इसी दौरान, कुलपति आवास में कराए गए कार्य का वर्क ऑर्डर और एस्टीमेट कॉपी की मांग की गई। फाइनेंशियल एडवाइजर ने कहा कि ये दस्तावेज CCDC के पास उपलब्ध हैं। जब CCDC से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि ऐसे दस्तावेज उनके पास नहीं हैं। इससे छात्रों में और आक्रोश बढ़ा।
इसी प्रकार, आशु इंटरप्राइजेज, जो पूर्व में GEM पोर्टल के माध्यम से विश्वविद्यालय को सामान आपूर्ति में भ्रष्टाचार के आरोपों में लिप्त रही है, लगातार विश्वविद्यालय में सुई से लेकर बड़े निर्माण कार्य तक सभी काम करवा रही है। मंच के सदस्यों ने पूछा कि आखिर इस कंपनी में ऐसा कौन-सा विशेष गुण है कि विश्वविद्यालय के अधिकांश कार्य इसी के माध्यम से कराए जा रहे हैं। मंच ने इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की।
