रांची: द आरएनबी क्लिनिक के तत्वावधान में शनिवार को ‘स्वास्थ्य जागरूकता पर रांची प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में गुरुग्राम और रांची के प्रख्यात चिकित्सा विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और आधुनिक समय में बढ़ती जटिल बीमारियों व उनके समाधान पर गहन चर्चा की। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता गुरुग्राम के विख्यात स्पाइन सर्जन डॉ वी आनंद नाइक ने ‘बैक पेन और सर्जरी की आवश्यकता’ विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और घंटों कुर्सी पर बैठने की आदत ने स्पाइन (रीढ़ की हड्डी) को कमजोर कर दिया है। लोगों में यह डर रहता है कि स्पाइन की समस्या मतलब सिर्फ सर्जरी है, जबकि हकीकत यह है कि 90 प्रतिशत मामलों में इसे बिना ऑपरेशन, सही फिजियोथेरेपी और लाइफस्टाइल में सुधार करके ठीक किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मोबाइल और लैपटॉप के अत्यधिक उपयोग से गर्दन और पीठ में बढ़ते दर्द का बड़ा कारण बन सकता है।
जैन चेस्ट केयर के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. योगेश कुमार जैन ने फेफड़ों की समस्याओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि रांची जैसे बढ़ते शहर में धूल और प्रदूषण के कारण अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों की संख्या बढ़ी है। उन्होंने फेफड़ों के शुरुआती लक्षणों को न पहचानने की भूल पर चेतावनी दी और आधुनिक ‘चेस्ट केयर’ उपचारों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 40 की उम्र के बाद फेफड़ों और हड्डियों की नियमित जांच जरूर कराएं।
द आरएनबी क्लिनिक के क्लीनिकल डायरेक्टर डॉ. रॉबिन्स कुमार ने फिजियोथेरेपी की भूमिका पर कहा कि दवाएं बीमारी को दबा सकती हैं, लेकिन शरीर की कार्यक्षमता को वापस लाने का काम फिजियोथेरेपी ही करती है। इलाज में रोबोटिक और लेजर फिजियोथेरेपी के लाभकारी साबित होता है। आरएनबी क्लिनिक में आधुनिक मशीनों के जरिए स्पोर्ट्स इंजरी और पैरालिसिस जैसे मरीजों का पुनर्वास किया जा रहा है।
