Ranchi: विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर सदर अस्पताल, रांची में सिकल सेल एनीमिया के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने हेतु एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार, राज्य नोडल पदाधिकारी ब्लड सेल डॉ. प्रमोद कुमार सिन्हा, राज्य नोडल पदाधिकारी IEC सेल डॉ. राहुल किशोर सिंह, राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. पंकज, हेमेटोलॉजिस्ट सदर अस्पताल डॉ. अभिषेक रंजन, डॉ एके झा सहित चिकित्सकगण, स्वास्थ्यकर्मी एवं अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे l
इस अवसर पर *सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार* ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया एक आनुवंशिक लेकिन रोकथाम योग्य बीमारी है। समय पर जांच, जागरूकता एवं उचित उपचार के माध्यम से इसके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि जिले के सदर अस्पताल एवं सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सिकल सेल एनीमिया की जांच पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध है। वर्तमान में गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच के दौरान भी सिकल सेल स्क्रीनिंग को शामिल किया गया है, जिससे गर्भावस्था के दौरान ही जोखिम की पहचान कर उचित परामर्श एवं प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने आमजन से अपील करते हुए कहा कि अधिक से अधिक लोग सिकल सेल एनीमिया की जांच कराएं तथा विवाह पूर्व जांच को भी बढ़ावा दें, ताकि आने वाली पीढ़ियों को इस बीमारी से सुरक्षित रखा जा सके।
कार्यक्रम के दौरान हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक रंजन* ने सिकल सेल एनीमिया के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि झारखंड में सिकल सेल जीन का प्रसार काफी अधिक है तथा राज्य की लगभग 8 से 10 प्रतिशत आबादी यानी 32 लाख लोगों में इसका जीन पाया जाता है। वहीं 1 से 2 प्रतिशत लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि सिकल सेल एनीमिया से ग्रसित बच्चों में पांच वर्ष की आयु से पहले मृत्यु का जोखिम अधिक रहता है तथा यह बीमारी व्यक्ति की जीवन प्रत्याशा को भी प्रभावित करती है। डॉ. अभिषेक रंजन ने बताया कि इस बीमारी के मरीजों को हाथ-पैर, पेट एवं छाती में असहनीय दर्द, बार-बार बुखार, खून की कमी, थकान, सांस फूलना एवं संक्रमण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। गंभीर मामलों में किडनी, फेफड़े और तिल्ली भी प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि समय पर हाइड्रॉक्सी यूरिया, फोलिक एसिड एवं अन्य आवश्यक उपचार लेने तथा मेनिंगोकोकल एवं इन्फ्लुएंजा जैसी वैक्सीन लगवाने से मरीजों की जीवन गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है.
