तिरुवनंतपुरम (केरल)। केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम के पास स्थित विझिंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट देश के सबसे आधुनिक और महत्वपूर्ण बंदरगाहों में से एक बनकर उभर रहा है। यह बंदरगाह अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्ग के बहुत करीब स्थित है, जिसके कारण बड़े-बड़े कंटेनर जहाज यहां आसानी से आ सकते हैं। समुद्र की प्राकृतिक गहराई इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।
विझिंजम पोर्ट को मुख्य रूप से ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका अर्थ है कि विदेशों से आने वाले बड़े जहाज यहां कंटेनर उतारेंगे और फिर उन्हें छोटे जहाजों के माध्यम से अन्य बंदरगाहों तक भेजा जाएगा। अभी भारत का काफी कंटेनर कारोबार कोलंबो, दुबई और मलेशिया जैसे विदेशी बंदरगाहों पर निर्भर है। विझिंजम के विकसित होने से यह कारोबार भारत में ही हो सकेगा।
पोर्ट में आधुनिक क्रेन, कंटेनर यार्ड और डिजिटल प्रबंधन प्रणाली स्थापित की गई है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में कंटेनरों का संचालन किया जा रहा है। बंदरगाह के विस्तार के साथ इसकी क्षमता और बढ़ेगी, जिससे भारत के आयात-निर्यात व्यापार को नई गति मिलेगी।
पोर्ट के CEO श्री प्रदीप जयराम ने इसकी कार्यप्रणाली, सुविधाओं और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। वहीं PRO श्री महेश गुप्तम ने तकनीकी प्रस्तुति के माध्यम से पोर्ट की संरचना, कंटेनर संचालन और जहाजों की आवाजाही को सरल ढंग से समझाया।
झारखंड के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
पहली नजर में लग सकता है कि समुद्र से दूर स्थित झारखंड का इस बंदरगाह से क्या संबंध है, लेकिन वास्तव में विझिंजम जैसे आधुनिक पोर्ट झारखंड के लिए भी काफी उपयोगी हैं। झारखंड देश के प्रमुख खनिज और औद्योगिक राज्यों में शामिल है। यहां से कोयला, लौह अयस्क, स्टील तथा अन्य औद्योगिक उत्पाद देश और विदेश भेजे जाते हैं।
यदि झारखंड का रेल और सड़क नेटवर्क ऐसे आधुनिक बंदरगाहों से बेहतर तरीके से जुड़ जाए, तो राज्य के उत्पाद कम लागत और कम समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सकते हैं। इससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और परिवहन क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
विझिंजम पोर्ट का अध्ययन यह सिखाता है कि आधुनिक बुनियादी ढांचा किसी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। केरल ने समुद्री क्षमता का उपयोग कर एक बड़ा व्यापारिक केंद्र विकसित किया है। इसी तरह झारखंड भी अपनी खनिज संपदा, औद्योगिक शक्ति और बेहतर परिवहन व्यवस्था के बल पर आर्थिक विकास को नई ऊंचाई दे सकता है।
