उच्च न्यायालय के आदेश के मुताबिक पेंशन भुगतान की माँग की
राँची: झारखण्ड के गैर सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों एवं संस्कृत विद्यालयों के सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने राज्य सरकार द्वारा पेंशन से संबंधित जारी अधिसूचना 3486 दिनांक 10.09.25 का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। बुधवार को मदरसों एवं संस्कृत विद्यालयों के सेवानिवृत्त कर्मियों की हुई बैठक में उक्त निर्णय लिया गया है। गोड्डा जिले के महगामा में काजी शफीक कासमी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में पूरे झारखण्ड के मदरसा – संस्कृत विद्यालयों के सेवानिवृत्त कर्मी शामिल हुए। बैठक में कहा गया कि शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में जारी अधिसूचना 3486 उच्च न्यायालय के निर्णय का विरुद्ध एवं कर्मियों के साथ अन्याय है। कर्मियों ने कहा उच्च न्यायालय ने मदरसों एवं संस्कृत विद्यालयों के सेवानिवृत्त कर्मियों को 2014 में जारी अधिसूचना 2020 के मुताबिक पेंशन व उपादान देने का स्पष्ट आदेश दिया है। सरकार उक्त अधिसूचना के मुताबिक ही हमें पेंशन व उपादान दे। नया अधिसूचना जारी कर हमारे अधिकारों को छीनने का प्रयास हो रहा। इस अधिसूचना के द्वारा अल्पसंख्यक विद्यालयों की तरह मदरसों को दिए जाने वाले सुविधाओं पारिवारिक पेंशन, उपादान, महंगाई भत्ता , पेंशन रूपांतरण एवं कोषागार से भुगतान जैसी सुविधाओं से वंचित रखा गया जिसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। बताया गया कि पेंशन से संबंधित उच्च न्यायालय में दायर याचिका की अगली सुनवाई 26 सितंबर को है, अदालत का जो भी निर्णय होगा उसका सम्मान करेंगे। अदालत का आदेश आने तक सेवानिवृत्त कोई भी शिक्षक पेंशन से संबंधित अभिलेख जिला शिक्षा पदाधिकारी के पास जमा नहीं करेंगे। बैठक में सेवानिवृत्त शिक्षक मो०अन्वर, मो०ताजुद्दीन कासमी, मौलाना सईद, मो० कलीमुद्दीन, मौलाना हदीस सहित अन्य उपस्थित थे।
