रांची: माननीय न्यायामूर्ति-सह-कार्यपालक अध्यक्ष झालसा श्री सुजीत नारायण प्रसाद के दिशा निर्देश पर, माननीय सदस्य सचिव झालसा कुमारी रंजना अस्थाना एवं माननीय न्यायायुक्त-सह-अध्यक्ष श्री अनिल कुमार मिश्रा-1 के मार्गदर्षन में डालसा सचिव श्री राकेष रौषन की उपस्थिति में आज दिनांक 23.06.2026 को डीपीएस स्कूल, रांची में छात्र-छात्राओं के लिए ‘डाॅन अभियान’ के तहत नशा मुक्ति पर एक विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डिप्टी एलएडीसी श्री राजेश कुमार सिन्हा, लाईफ सेवर्स एनजीओ के प्रमुख अतुल गेरा, एनसीबी के शारिक उमर, सीआईडी के नवीन कुमार, रिजवान अंसारी, विधि के छात्र-छात्राएं, पीएलवी अमर कुमार एवं चालक राजा वर्मा समेत अन्य लोग उपस्थित थे।
राजेश कुमार सिन्हा ने एनडीपीएस एक्ट के बारे में छात्र-छात्राओं को जानकारी दी तथा इससे संबंधित कठोर कानून के बारे में विस्तार से बतलाया। अफीम या पोस्ता के उत्पादन या कब्ज़े पर एनडीपीएस अधिनियम 1985 के तहत मात्रा के आधार पर 20 साल तक के कठोर कारावास एवं 2 लाख रूपये के जुर्माने की सजा हो सकती है। बार-बार अपराध करने पर मृत्युदंड तक दिया जा सकता है। श्री सिन्हा ने नालसा टाॅल फ्री नम्बर 15100 पर फोकस किया।
लाईफ सेवर्स एनजीओ के अतुल गेरा ने कहा कि नशा साईलेन्ट टेररिज्म की तरह है, जो हमारे देश को खोखला कर रहा है। नशा से बचने के लिए छात्र-छात्राओं को जागरूक करना आवश्यक है। नशा के पेडलर नवयुवक एवं छात्रों को इस व्यवसाय में आसानी से उपयोग करते है, जिससे हमलोगों को सचेत रहना है और किसी भी तरह का ड्रग्स पेडलरों के द्वारा दिये जा रहे लालच में न आये।
एनसीबी के शारिक उमर ने कहा कि झारखंड में इस नशे की समस्या को रोकने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की भूमिका महत्वपूर्ण है। यह क़ानूनों के कार्यान्वयन और हितधारकों के बीच समन्वय के लिए ज़िम्मेदार है। नशे की दवाओं का उत्पादन और वितरण इस समस्या की जड़ तक पहुँचता है। अधिकांश तस्करी के गिरोह संसाधनों की कमी के कारण पकड़े नहीं जाते। गृह मंत्रालय ने पिछले महीने मादक द्रव्यों के सेवन से संबंधित किसी भी संदेह की जानकारी देने के लिए आम जनता के लिए मानस हेल्पलाइन (टोल फ्री नं. 1933) स्थापित की है।
सी.आई.डी के नवीन कुमार ने मादक पदार्थों की तस्करी से संबंधित जानकारी प्रदान की तथा मादक पदार्थों की तस्करी में बच्चों और नवयुवकों को कैसे उपयोग में लिया जा रहा है, इससे बचने के लिए उन्होंने छात्रों को बतालाया। कुछ लोगों के लिए नशे की यात्रा 16 वर्ष या इससे कम उम्र से ही शुरू हो जाती है। पुनर्वास केंद्रों की अधिक जनसंख्या उनके लिए एक बड़ी समस्या बन गई है। यदि राँची में नशे की समस्या पर नियंत्रण पाया जाए, तो अपराध दर में लगभग 70 प्रतिशत की कमी आ सकती है। राँची में नशीली दवाओं से संबंधित किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना अधिकारियों को देने की सलाह उन्होंने दी।
