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विस्थापितों के नाम से नेतागिरी करने वालों की संपत्ति करोड़ों में
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देखिये.. जामडीह इलाके में बने आलीशान मकान के फोटो और वीडियो
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आम विस्थापितों के लिए जिंदगी बन गई है चुनौती
एवीएन पोस्ट की टीम ने काफी मशक्कत के बाद कुछ तस्वीरें और वीडियो बनाने में सफलता हासिल की है. इन तवीरों और वीडियो को देखिए और अंदाजा लगाइए कि यह महल जैसे घर, शानो शौकत के मालिक कौन होंगे. घर के अलावा फार्म हाउस भी रखा गया है जहाँ बड़े बड़े लोगों का आना जाना लगा रहता है और उसी परिसर में तालाब से लेकर कई तरह की सुविधाएं रखी गई हैं. इतना ही नहीं इसके अलावा सैकड़ों की संख्या में पे लोडर, हाइवा, टेलर , फॉर्च्यूनर और कई कई स्कॉर्पियो गाड़ियां तो दरवाजे पर खड़ी सड़ती रहती हैं.
चौंक गए ना…! यह आलीशान मकान और फार्महाउस पिपरवार थानाक्षेत्र के जामडीह इलाके में हैं. इस तरह की कई संपत्तियों के मालिक विस्थापन कमिटी के कर्ताधर्ता नेतागण हैं. यह वो नेता हैं जिन्हें राजनीति से मतलब नहीं इन्हें मतलब है तो केवल काले हीरे और काले हीरे की खान से अर्थात कोयले से. कोयला कम्पनियां, ट्रांसपोर्टिंग कंपनियां , माइंस से लेकर प्रशासन तक इनकी धमक गूंजती है. सीसीएल में विस्थापन नीति के तहत नौकरी भी मिल गई है लेकिन जैसा इनका रहन सहन और घर गाड़ियां हैं वह सीसीएल के किसी अधिकारी रैंक के व्यक्ति को भी वेतन से हासिल नहीं हो सकता.
बीगन भोक्ता और नरेश गंझू का आवास
ऊपर वीडियो में जो आप तस्वीरें देख रहे हैं वह आलीशान मकान विस्थापित कमिटी के नेता बीगन भोक्ता और नरेश गंझू के बताए जा रहे हैं. हालांकि, दोनों ही लोगों की सीसीएल में नौकरी है और उन्हें रहने के लिए सीसीएल कालोनी में क्वाटर भी मिला हुआ है.चश्मदीदों की मानें तो मकान के भीतर एयर कंडीशन से लेकर गद्देदार बिस्तर तक ऐसा कुछ भी नहीं जो नहीं है. लेकिन एक आम विस्थापित परिवार के घर जाकर देखिए तो हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. दो वक्त के खाने पर लाले पड़े हैं.

क्या कहते हैं स्थानीय लोग
इलाके के स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके आधिकारों की लड़ाई लड़ने के नाम पर विस्थापन कमिटी के नेता पुलिस का और नक्सलियों के लिए फंड उगाही करते हैं जिसमें मोटा हिस्सा इन नेताओं का होता है. इन्हीं रुपयों से इनकी संपत्ति दिनोदिन बढ़ती जा रही है और दूसरी तरफ आम विस्थापितों को उनका हक का पैसा भी नहीं मिलता. सीसीएल का स्थानीय प्रबंधन भी इन्हीं नेताओं को मैनेज कर पर्दे के पीछे से वसूली का काला खेल, खेल रहा है.
सिंडीकेट में स्थानीय पुलिस और सीसीएल के अधिकारी
जो जानकारियां छन कर सामने आ रही हैं उनसे साफ है कि विस्थापित कमिटी के नाम से टेरर फंडिंग करने वाले लोगों को स्थानीय पिपरवार थाना पुलिस, सीसीएल के अधिकारियों और टीपीसी के कुछ बड़े नेताओं का संरक्षण प्राप्त है जिसके कारण यह लोग बेखौफ होकर कोयला कारोबारियों से पैसा वसूली कर सबका हिस्सा पहुंचा रहे हैं.
वर्जन
दोनों लोगों के संबंध में जानकारियां मिली हैं..पिपरवार थाना को स्पष्ट निर्देश है कि इलाके में कोई भी गैरकानूनी कार्य ना होने दिया जाए. मामले की जांच की जा रही है और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी. किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
अनिमेश नैथानी
चतरा एसपी
