मंत्री जी, विधायक जी बचा लीजिए विक्रम जैन से खाता 65 की आदिवासी जमीन
1985-1990 के बीच किया गया कंपनसेशन..पूर्व सीओ स्व जयकुमार राम के कार्यकाल में हुए कई म्यूटेशन
जगतपुरम की अधिकांश जमीनों का कंपनसेशन इसी अवधि के दौरान..अनिल, नरेश और चपरासी संतोष का है जलवा
माननीय मंत्री दीपक बिरुआ जी…माननीय कांके विधायक सुरेश बैठा जी…बचा लीजिए जगतपुरम की खाता नम्बर 65 की जमीन. आखिर इन्हीं भोले भाले आदिवासियों के वोट से जीतकर आपलोग सत्ता में आए हैं और आपके रहते जल, जंगल, जमीन की लड़ाई लड़ रहे सीएम हेमंत सोरेन और आदिवासियों के आंदोलन पर जमीन माफिया कब्जा करते जा रहे हैं. ताजा मामला जगतपुरम के खाता नम्बर 65 का है. यह जमीन खतियान में आदिवासियों के नाम से दर्ज है लेकिन उसके बाद तरह तरह के दस्तावेज सामने आ रहे हैं जो जमीन को गैर आदिवासी के नाम से बता रहे हैं. सच्चाई तब तक सामने नहीं आ सकेगी जब तक मामले की निष्पक्ष जांच ना हो जाए.

खतियान में बुकरा मुंडा…पंजी 2 में कई गैर आदिवासी
जगतपुरम के भीठा मौजा स्थित खाता नम्बर 65 की करीब 4 एकड़ जमीन खतियान में बुकरा मुंडा के नाम से दर्ज है लेकिन जब इस खाता का पंजी 2 देखियेगा तो चौंक जाइयेगा. कई गैरआदिवासियों के नाम से म्यूटेशन करा लिया गया है. दस्तावेज बताते हैं कि पहले 1985 से 1990 के बीच जमीन का कंपनसेशन किया गया उसके बाद इसकी फिर से रजिस्ट्री की गई. अधिकांश जमीनों का म्यूटेशन पूर्व कांके सीओ जयकुमार राम के समय किया गया जिनपर भ्रष्टाचार के गम्भीर आरोप हैं और ईडी मामले की जांच कर रही है.

स्थानीय लोगों का दावा विक्रम जैन कर रहा है कब्जा
स्थानीय लोगों का कहना है कि उक्त जमीन पर रांची के जाने माने कारोबारी विक्रम जैन और उनकी टीम कब्जा कर काम करवा रही है. यह टीम ज्यादातर आदिवासियों की जमीन औने पौने दामों पर खरीदती है और फिर अपने रसूख के दम पर उसके फर्जी दस्तावेज बनाकर करोड़ों का मुनाफा करती है. कांके रोड के जगतपुरम, नगड़ी, बुकरु इलाके में इनके कई गुर्गे इन्हीं के फाइनेंस पर काम करते हैं. आदिवासी रैयतों ने कई बार इस मामले की शिकायत की है लेकिन आदिवासियों के राज्य में न्याय के सभी रास्ते आदिवासियों के लिए ही बंद हो गए हैं.
1985 से 1990 के बीच के कंपनसेशन..अनिल, नरेश और संतोष का जलवा
हाल में ही ऐसे कई दस्तावेज मिले हैं जिनमें अधिकांश में आदिवासियों की जमीन 1985 से 1990 के बीच कंपनसेशन कराए गए हैं. इनमें भी सबसे ज्यादा म्यूटेशन कांके के पूर्व सीओ (अब स्व) जयकुमार राम के कार्यकाल में किए गए. दरअसल यह सारे कंपनसेशन के दस्तावेज फर्जी बताए जा रहे हैं और इन्हें बनाने वालों में जमीन कारोबारी अनिल, पूर्व बैंककर्मी नरेश और एक चपरासी संतोष का नाम सबसे ऊपर है.
