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विस्थापित मंच के बिगन भोक्ता, विनय खलखो और नरेश गंझू को किसका संरक्षण ?
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विजय मिंज कर रहा उगाही…करोड़ों के बंदरबांट में सीसीएल अधिकारियों की सांठगांठ
चतरा जिले के पिपरवार इलाके में स्थित एनके एरिया की पूर्णाडीह परियोजना पर दहशत के साए में है. कोयला कारोबारियों की हालत ऐसी हो गई है कि बिना लेवी भुगतान के एक गाड़ी कोयला का उठाव नहीं किया जा सकता और अगर किसी ने हिम्मत की तो बेखौफ अपराधियों का निशाना बन जा रहे हैं. स्थानीय कारोबारियों का आरोप है कि परियोजना क्षेत्र में कोयला उठाव, लोडिंग और परिवहन से जुड़े तमाम कार्यों में करोड़ो की।वसूली की जा रही है.
बिगन, विनय, नरेश का नाम सुर्खियों में..विजय मिंज है कलेक्शन एजेंट
विस्थापित मंच से जुड़े बिगन भोक्ता, विनय खलखो और नरेश गंझू के नाम इस परियोजना से वसूली करने के मामले में सुर्खियों में है. वसूली की रकम कलवारी क्षेत्र में विजय मिंज के पास पहले जमा कराई जाती है. विजय मिंज के द्वारा सारा पैसा फिर विस्थापित मंच के नेताओं के तक पहुंचाया जाता है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ लोग विस्थापितों के रोजगार के मुद्दे की आड़ में कोयला परियोजना में दबाव बनाकर कथित वसूली करते हैं.
टेरर फंडिंग का काला खेल
कारोबारियों के अनुसार, परियोजना में टोकन, कमेटी और लोडिंग के नाम पर अलग-अलग राशि लिए जाने की शिकायत है. आरोप है कि 6500 टोकन के नाम पर 140 रुपये प्रति टन विस्थापित कमेटी राशि तथा लोडिंग के लिए अलग राशि ली जाती है. इसके अलावा लाइनिंग, पार्किंग के लिए अलग से पैसे लिए जाते हैं.कारोबारियों का दावा है कि वसूली की इस व्यवस्था में स्थानीय पुलिस, सीसीएल अधिकारी, नक्सली समेत कई लोग मालामाल हो रहे हैं.
घटनाओं से दहशत में हैं कारोबारी
कोयला कारोबारियों का कहना है कि परियोजना में वसूली करने वाले लोग जंगल से लेकर प्रशासन तक को मैनेज कर चुके हैं. अगर किसी कारोबारी ने इस अवैध वसूली के खिलाफ विरोध किया तो या तो उसकी हत्या के दी जा रही है या गाड़ियां जला दी जाती हैं.
केस स्टडी 1
कोयला व्यवसायी साबिर अंसारी (साबिर अहमद) की हत्या पुरनाडीह कांटा घर के पास अज्ञात अपराधियों द्वारा गोली मारकर की गई थी. गंभीर रूप से घायल अवस्था में उन्हें इलाज के लिए रिम्स (RIMS) में भर्ती कराया गया जहां उनकी मौत हो गई थी. इस हत्याकांड में टीपीसी (TPC) नक्सली संगठन के एरिया कमांडर आदेश गंझू का नाम मुख्य रूप से सामने आया था
केस स्टडी 2
पिपरवार में काम कर रहे कोल लिफ्टर विनोद गिरी पर अज्ञात अपराधियों ने ताबड़तोड़ गोलियां दागी थीं. विनोद पर हमले के पीछे भी टेरर फंडिंग का नेटवर्क काम कर रहा था.
