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कहां गई आदिवासी युवक मार्टिन की 60 डिसमिल जमीन…क्या हुआ राजेश और राकेश महतो के साथ ?
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ब्रह्मचारी नगर में दबे हैं आदिवासियों के साथ ठगी के कई मामले
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डबल मर्डर के साथ शुरू हुआ था जगतपुरम बसाने का काला खेल, पुलिस माफिया गठजोड़
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अगला चैप्टर– अरे..कांके विधायक सुरेश बैठा का घर जगतपुरम में.! जालसाजी की जानकारी नहीं या खास जमीन कारोबारी को संरक्षण? अब PIL की तैयारी
कांके रोड जैसे बेशकीमती और हाईप्रोफाइल इलाके में सुनियोजित तरीके से लैंड स्कैम को अंजाम दिया जा रहा है. जगतपुरम और ब्रह्मचारीनगर के नाम से बसाए जा रहे इलाकों में आदिवासियों की जमीन पर कब्जा, फर्जी दस्तावेज तैयार करने से लेकर हत्या और गैंगवार तक को सरेआम अंजाम दिया जा रहा है. एक तरफ ब्रह्मचारी नगर में गैरमजरूआ से लेकर भुईंहरी और जरपेशगी (गिरवी) जमीनों से आदिवासियों को बेदखल किया जा रहा है तो दूसरी तरफ जगतपुरम में बैक डेट से कम्न्सेशन और आदिवासी पत्नी के नाम से आदिवासियों की जमीन लेकर सामान्य जाति के लोगों को बेधड़क बेचा जा रहा है.
*आदिवासी युवक मार्टिन के साथ ठगी पर बसा ब्रह्मचारी नगर कॉलोनी*
चौड़ी बस्ती के रहने वाले आदिवासी युवक मार्टिन की 60 डिसमिल जमीन की ठगी के साथ ब्रह्मचारी नगर इलाके पर कब्जे की साजिश रची गई. हत्याकांड के आरोप में जेल में बंद हरेन्द्र सिंह ने मार्टिन की जमीन का सबसे पहले इकरारनामा कराया. जानकारों की मानें तो एक लाख रुपए कट्ठा में ली गई आदिवासी जमीन को सादा पट्टा और फर्जी दस्तावेजों के साथ 10 लाख रुपए डिसमिल की रेट पर जमीन बेची गई. आज भी मार्टिन की जमीन के जांच में सारे खुलासे खुद ब खुद होते चले जाएंगे. रास्ता निकालने के बाद स्व रामप्रवेश सिंह ( अब मृत) और उसके करीबी लोगों ने धीरे धीरे पूरे इलाके को कब्जे में लेना शुरू किया. वकील, पुलिस और माफिया का ऐसा गठबंधन इलाके में बना कि 60000 ( साठ हजार) से लेकर एक लाख तक जमीनों का एकरारनामा करवाया गया और 10 लाख से लेकर 15 लाख तक जमीनों की बिक्री की गई.
*डबल मर्डर से बसाया गया जगतपुरम*
जगतपुरम की जमीनों को औने पौने दाम में खरीदने और बेचने के मामले में दो भाईयों राकेश महतो और राजेश महतो ने जब आवाज बुलंद की तब एक भाई राकेश लापता हो गया जबकि दूसरा भाई राजेश महतो और कांके ब्लॉक निवासी राजीव रंजन सिंह की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई. इस डबल मर्डर के साथ जगतपुरम की नींव रखी गयी जिसके बाद इलाके में दहशत के कारण जमीन माफियाओं का वर्चस्व बढ़ता चला गया.
*6 नवंबर को नामकुम के राइसा मोड़ में हुआ राजेश और राजीव का डबल मर्डर*
साल 2013 , नवंबर की 6 तारीख को दिनदहाड़े नामकुम के राइसा मोड़ के पास ताबड़तोड़ गोलियां चलीं और राजेश महतो के साथ राजीव रंजन की हत्या कर दी गई. कांड की जांच में सुपारी कीलिंग की बात सामने आई लेकिन जगतपुरम के जमीन कारोबारियों का रसूख देखिये मामला आज तक फाइलों में दब धूल फांक रहा है. तत्कालीन थानेदार बिनोद कुमार ने जब मामले की जांच शुरू की तब राजेश महतो को किसने बुलाया, किसके इशारे पर हत्या हुई इस एंगल पर जांच आते ही शक की सुई जगतपुरम की जमीन बेचने वाले चितरंजन और अवधेश यादव पर जाकर टिक गई थी. लेकिन, माफिया पुलिस गठजोड़ ने पूरे मामले को दबा डाला.
*अचानक गायब हो गया था राजेश का भाई राकेश महतो*
राजेश महतो हत्याकांड से पूर्व उसका भाई राकेश महतो इन जमीन कारोबारियों की राह का सबसे बड़ा रोड़ा था. राकेश घूमने के लिए असम गया लेकिन उसके बाद रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया.राकेश के गायब होने पर उसके भाई राजेश महतो ने जमीन कारोबारियों पर आरोप लगाये हुए अप्रिय घटना की आशंका जताई लेकिन राजेश महतो हत्याकांड से राकेश के गायब होने का मामला भी पूरी तरह दब गया. दोनों भाइयों की जगतपुरम इलाके में बेशकीमती जमीन है जिसपर अब माफिया का कब्जा है.
