तमिलनाडु में डीएमके का सफाया, अभिनेता विजय का करिश्मा
केरल में यूडीएफ ने परचम लहराया
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों के नतीजों का इंतजार खत्म हो गया। बंगाल चुनाव की मतगणना में भाजपा बहुमत का आंकड़ा पार कर 200 सीटों पर जीत दर्ज कर टीएमसी को सत्ता से बाहर कर दिया है। भाजपा के सुनामी में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी बह गयी है। वहीं असम में भाजपा का जलवा बरकरार है। मुख्यमंत्री हेमंता विस्व सरमा ने न केवल राज्य में भाजपा का परचम लहराये रखा है बल्कि कांगे्रस के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद गौरव गगोई को करारी हार का समना करना पड़ा है। केरल में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की हार वाम दलों के लिए बड़ा झटका है. पांच दशकों में पहली बार होगा, जब भारत में कोई कम्युनिस्ट मुख्यमंत्री नहीं होगा. पश्चिम बंगाल में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के खराब प्रदर्शन के साथ, जो राज्य 1977 से 2011 तक लेफ्ट का गढ़ था, ये हार मतदाताओं द्वारा वाम दलों को खारिज करने का ट्रेंड दिखाती हैं. केरल में 2016 में सत्ता में आई पिनाराई विजयन सरकार को कम्युनिस्ट शासन का आखिरी गढ़ माना जा रहा था, क्योंकि 2011 में तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में लेफ्ट के 34 साल के शासन को खत्म कर दिया था. इसके बाद 2018 में भारतीय जनता पार्टी ने त्रिपुरा में लेफ्ट फ्रंट के 25 साल के राज को खत्म कर दिया था. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को कोलाथुर निर्वाचन क्षेत्र में हार का सामना करना पड़ा है. उन्हें विजय की पार्टी टीवीके उम्मीदवार वी.एस. बाबू ने कड़े मुकाबले में हराया. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में किसी मुख्यमंत्री की हार का यह केवल दूसरा मौका है. इससे पहले 1996 के चुनावों में जयललिता ने बरगुर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा था और उन्हें डीएमके उम्मीदवार ने हरा दिया था. उस वक्त जयललिता मुख्यमंत्री थीं. पुडुचेरी में एन रंगास्वामी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की वापसी हुई है। 30 सदस्यों वाली विधानसभा में 11 सीटों में ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस 12 सीटों पर जीत दर्ज की है। उसकी एनडीए सहयोगी भारतीय जनता पार्टी 2 सीटों पर जीत दर्ज की है। ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम 1 सीट पर सफलता मिली है। निर्दलीयों ने तीन सीटों पर कब्जा जमाया है। पश्चिम बंगाल में भाजपा ने 206 सीटों पर कब्जा का टीएमसी को सत्ता से बाहर कर दिया है। टीएमसी को सिर्फ 81 सीटों पर संतोष करना पड़ा है। कांगे्रसको को दो, सीएीआईएम और एआईएसएफ को 1ः1 सीट मिली है। असम में भाजपा ने 82 सीटों पर कब्जा कर अपना जलवा बरकरार रखा है। सीएम हेमंता विस्व सरमा ने तीसरी बार राज्य में भाजपा को सत्ता दिलाने में सफलता हासिल की है। राज्य में कांगे्रस 19 सीटों पर सिमटकर रह गयी है। बोडो लैंढ पीपुल्स फ्रंट ने 10, असम गण परिषद ने 10, एआईयूडीएफ के 2, टीएमसी और आरजेआरडी के एक एक उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है।
तमिलनाडु के नए जन नायक बने थलपति विजय

अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्त्री कजगम (टीवीके) ने रुझानों में बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. वह 106 सीटों पर जीत दर्ज जीत दर्ज कर वामदल को सत्ता से बाहर कर दिया है। हालांकि वह बहुमत के 118 सीटों के आंकड़े से थोड़ा दूर हैं, लेकिन संभावना है कि उन्हें दोनों द्रविड़ गठबंधनों की छोटी पार्टियों का समर्थन मिल जाएगा. तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में सबसे बड़े चेहरे के रूप में उभरे थलपति विजय ने राज्य की द्रविड़ पार्टियों को हैरान कर दिया है, जो एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत का संकेत है. अपनी पहली चुनावी पारी में शानदार प्रदर्शन करते हुए, विजय ने अपनी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) के जरिए खुद को तमिलनाडु का असली जन नायक साबित कर दिया है. इन नतीजों ने विजय को एन.टी. रामा राव, एम.जी. रामचंद्रन और जे. जयललिता जैसे दिग्गज अभिनेता-नेताओं की श्रेणी में खड़ा कर दिया. उनके इस प्रदर्शन से साफ है कि उनकी फिल्मी लोकप्रियता अब जनता के साथ एक गहरे भावनात्मक जुड़ाव में बदल चुकी है, जो चुनावी जनादेश में साफ दिखाई दे रही है. एडीएमके को 47, पीएमके और कांगे्रस को 5-5, और आईयूएमएल व सीपीआई को 2-2 सीटें मिली है। दलपति विजय अपने दो साल के राजनीतिक कार्यकाल में राज्य की सत्ता हासिल करने में सफलता हासिल की है।
