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Home»राज्य»झारखंड»सीसीएल की अशोका परियोजना में टेरर फंडिंग, विस्थापित उतरे सड़क पर
झारखंड

सीसीएल की अशोका परियोजना में टेरर फंडिंग, विस्थापित उतरे सड़क पर

avnpostBy avnpostJuly 20, 2026No Comments5 Mins Read
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  • हर माह करोड़ों की वसूली कर रहे महेन्द्र गंझू, नागेश्वर, आशिक अली समेत कई लोग

  • सब का हिस्सा फिक्स..विस्थापितों का हाल बेहाल

सीसीएल (CCL) पिपरवार की अशोका परियोजना क्षेत्र में विस्थापितों के नाम पर वसूली का काला खेल चल रहा है. विस्थापित महिलाओं ने अशोका परियोजना में धावा बोल घंटो तक काम ठप्प करवा दिया. पीड़ितों को कहना है कि विस्थापितों के नाम पर कमिटी के लोग वसूली तो करते हैं लेकिन रुपया विस्थापितों के कल्याण के लिए नहीं लगा जाता बल्कि विस्थापित मोर्चा के नेताओं की प्रापर्टी बढ़ाने में इस्तेमाल होता है. परियोजना क्षेत्र में कुछ असामाजिक तत्वों और तथाकथित कमेटियों द्वारा विस्थापितों के नाम पर ‘टेरर फंडिंग’ और करोड़ों रुपये की अवैध उगाही की जा रही है. हैरानी की बात यह है कि इस अवैध धंधे में कथित रूप से नक्सलियों और कुछ सफेदपोशों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है लेकिन ना तो सीसीएल के अधिकारी इस मामले पर कुछ कहना चाह रहे हैं ना ही एनआईए इस मामले को गंभीरता से ले रही है. प्रबंधकीय व्यवस्था के तहत अवैध उगाही करने वाले लोगों के खिलाफ पुलिस में भी कोई शिकायत दर्ज नहीं करायी जाती जिसके कारण पुलिस के हाथ भी बंधे हुए हैं. कोई भी नोटिस नहीं जारी किया गया है

विस्थापितों के नाम पर वसूली और पीड़ितों को करना पड़ रहा आंदोलन

शनिवार को अशोका कांटा घर पर विस्थापित महिलाओं के द्वारा जबरदस्त प्रदर्शन किया गया. महिलाओं का कहना है कि लंबी लड़ाई के बाद सीसीएल ने विस्थिपतों के लिए कुछ विशेष व्यवस्थाएं की हैं लेकिन विस्थापित मोर्चा के नाम पर नक्सलियों के खासमखास लोग काबिज हो गए हैं और विस्थापितों को मिलने वाला सारा रुपया टेरर फंडिंग, प्रशासन मैनेज समेत अन्य कार्य में लगा रहे हैं.

महेंद्र गंझू, आशिक अली और ट्रक ऑनर एसोसिएशन के नागेश्वर गंझू की बादशाहत

अशोक परियोजना में विस्थापित मोर्चा के नाम से महेंद्र गंझू, आशिक अली और ट्रक ऑनर एसोसिएशन के नागेश्वर गंझू की बादशाहत चल रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, अशोका परियोजना के अंतर्गत रोजाना 350 से 400 हाइवा और ट्रक कोयले का उठाव किया जाता है. विस्थापितों के हित के नाम पर बनाई गई यह कमेटी हर हाइवा से प्रति टन ₹60 की अवैध वसूली कर रही है. इसके अलावा अन्य स्रोतों के जरिए वसूली की यह रकम 205 रुपये प्रति टन के करीब की जाती है. आंकड़ों की मानें को हर माह करीब 20 करोड़ रुपयों की अवैध वसूली की जा रही है. विस्थापित मोर्चा के नेता जो जानकारी आम लोगों को देते हैं उसके अनुसार इस वसूली के खेल में नक्सलियों (TSPC) के लिए ₹60, पुलिस के नाम पर ₹40, सीसीएल अधिकारियों के नाम पर ₹35, कमेटी के गुर्गों के लिए ₹15 और यहाँ तक कि कथित पत्रकारों के नाम पर भी ₹5 प्रति टन का बंदरबांट तय है!

अशोका परियोजना के काँटा पर इनका है कब्जा

इलाके में कोयला कारोवारी से लेकर पुलिस तक जानती है कि कांटा संख्या 1 और 2 पर महेंद्र गंझू और आशिक अली का कब्जा है.
कांटा संख्या 4 पर विजय महतो और अमर महतो हैं टेरर फंडिंग के मोहरे
रोड सेल से प्रतिमाह करोड़ों की वसूली में सीसीएल अधिकारी भी शामिल!
ट्रक संचालकों ने नाम नहीं प्रकाशित करने के आग्रह के साथ बताया क प्रति हाइवा करीब 2,000 रुपयों की अतिरिक्त वसूली होती है. जिससे रोजाना 6 से 8 लाख रुपये और सालाना करीब 20 से 25 करोड़ रुपये की उगाही की जा रही है. सूत्रों का दावा है कि इस भारी-भरकम राशि का 40 से 50 हजार प्रतिदिन का हिस्सा सीसीएल के डिस्पैच अधिकारियों के द्वारा सीसीएल के स्थानीय पदाधिकारियों तक भी पहुँचाया जाता है ताकि इस अवैध काम को संरक्षण मिलता है. प्रबंधन को जानकारी है लेकिन लिफ्टर कोयला व्यवसाई को सचेत करने के लिए प्रबंधन के द्वारा कोई नोटिस नहीं जारी किया गया है.

परियोजना के लोडर लोगों की जांच में हो जाएगा खुलासा

यह अवैध उगाही स्पेशल लोडिंग के नाम पर लिया जाता है इसमें लोडर की भूमिका निभाने वाले सभी प्रमुख लोग विस्थापित कमिटी में शामिल हैं. जहां आम विस्थापित भूखमरी के शिकार है वहीं विस्थापित कमिटी के लोगों के पास फॉरच्यूनर के साथ साथ सभी लक्जरी गाड़ियां है. करोड़ों का घर जंगल में बना रखा है. अगर इन लोडिंग का काम करने वाले लोगों की संपत्ति की जांच कर ली जाए तो सारे खुलासे सामने आ जाएंगे. कोई भी आउट सोर्स कंपनी बिना इन विस्थापित मोर्चा से बात किए इलाके में काम नहीं कर सकती है. लेकिन दर्द इस बात का है जिस विस्थापित कमिटी की दुहाई दी जाती है वह सिर्फ कागजों तक सीमित है कल ही शनिवार को विस्थापित महिलाओं ने कई घंटों तक काम को रोक कर रखा .

जनता और स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश

जनता और स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जब उगाही करने वाले लोगों के नाम जगजाहिर हैं, तो पुलिस और प्रशासन उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है. इन लोगों ने इलाके में यह भी दावा किया है कि इनपर उग्रवादी संगठन टीपीसी (TPC) का संरक्षण है. विस्थापितों के नाम पर बनी इस कमेटी के सक्रिय सदस्यों के द्वारा अवैध वसूली का एक बड़ा हिस्सा टेरर फंडिंग के रूप में उग्रवादियों तक पहुँचाया जा रहा है. जिससे क्षेत्र की सुरक्षा और विकास कार्यों पर भी बुरा असर पड़ रहा है.
वर्जन
मैं एक हफ्ते से छुट्टी में हूं कल से ड्यूटी ज्वाइन करुंगा. अभी इस मामले में कुछ कह नहीं सकता.
जेके सिंह
पीओ
अशोका परियोजना

पुलिस इस मामले को सख्ती से देख रही है. अगर इस तरह की अवैध वसूली की जा रही है तो सीसीएल अधिकारियों या ट्रक संचालकों को लिखित शिकायत करनी चाहिए उनका नाम गुप्त रखा जाएगा. अवैध वसूली या टेरर फंडिंग करने वालों की जगह सीधे सलाखों के पीछे है.
अनिमेष नैथानी
एसपी, चतरा

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