रांची । कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस एंड असेसमेंट (कैम्ब्रिज) ने आईसीएसई स्कूलों के लिए दो नई सीरीज लॉन्च की हैं। इनमें ‘एक्सीलेंस मैथमेटिक्स’ और ‘एक्सीलेंस एनवायरनमेंटल साइंस एंड साइंस’ शामिल हैं। इनका मकसद बच्चों को सिर्फ रटकर याद करने के बजाय सवाल पूछने, खुद चीजों को समझने और जो कुछ वे सीखते हैं, उसे असल जिंदगी की समस्याओं को हल करने में इस्तेमाल करना सिखाना है।
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस एंड असेसमेंट में साउथ एशिया के स्कूल्स के वाइस प्रेसिडेंट विशाल धवन ने कहा आज एसटीईएम की पढ़ाई में बच्चों को सिर्फ विषयों की जानकारी देना काफी नहीं है। उन्हें अलग-अलग चीजों के बीच संबंध समझना, सबूतों के आधार पर सोचना, सही सवाल पूछना और सीखी हुई बातों को नई परिस्थितियों में इस्तेमाल करना भी आना चाहिए। कैम्ब्रिज की नई आईसीएसई सीरीज के जरिए इन सभी बातों को रोजाना की पढ़ाई का हिस्सा बनाने की कोशिश की गई है। इसमें कॉन्सेप्ट को अच्छी तरह समझने, सवाल पूछने, खुद गतिविधियां करके सीखने, असल जिंदगी के उदाहरणों और नियमित टेस्ट के जरिए बच्चों की समझ को परखने पर ध्यान दिया गया है। हमारा मकसद शिक्षकों को ऐसी अध्ययन सामग्री देना है, जिससे बच्चों को विषयों को गहराई से समझने में मदद मिले और वे धीरे-धीरे आत्मविश्वास के साथ अपने दम पर सीखना भी शुरू करें।”
इन दोनों सीरीज को रांची में कैम्ब्रिज के एक कार्यक्रम ‘डिस्कवर. एक्सप्लोर. क्रिएटरू द फ्यूचर ऑफ एसटीईएम लर्निंग’ में लॉन्च किया गया। इस कार्यक्रम में कईं स्कूल के प्रिंसिपल, एकेडमिक कोऑर्डिनेटर और शिक्षक शामिल हुए। यहां इस बात पर चर्चा हुई कि भारतीय क्लासरूम में एसटीईएम यानी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स की पढ़ाई को किस तरह ज्यादा दिलचस्प और प्रैक्टिकल बनाया जा सकता है, ताकि बच्चे सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि उसे असल जिंदगी में भी इस्तेमाल करना सीखें।
ये किताबें एनईपी 2020 और आईसीएसई के नए पाठ्यक्रम, दोनों को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं। इससे स्कूलों को दोनों के दिशा-निर्देशों के अनुसार पढ़ाई कराने में आसानी होगी, बिना उन्हें अलग-अलग जरूरतों के तौर पर देखने के।
‘एक्सीलेंस मैथमेटिक्स’ सीरीज की सह-लेखिका और डी पेडागोजिक्स से जुड़ी मीनाक्षी उबेरॉय ने कार्यक्रम में बताया कि एसटीईएम की पढ़ाई में अब रटने के बजाय सवाल पूछने, खोजने और खुद सीखने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में शिक्षक की भूमिका भी बदल रही है। अब शिक्षक का काम सिर्फ बच्चों को जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें खुद सोचने, समझने और नई चीजें सीखने के लिए प्रेरित करना भी है।
