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Home»देश»जेएसएससी-सीजीएल समेत नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर रोक बरकरार, 7 अक्टूबर को अगली सुनवाई
देश

जेएसएससी-सीजीएल समेत नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर रोक बरकरार, 7 अक्टूबर को अगली सुनवाई

avnpostBy avnpostSeptember 18, 2026No Comments4 Mins Read
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रांची । झारखंड उच्च न्यायालय ने जेएसएससी-सीजीएल (विज्ञापन संख्या 10/2023) समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश पर लगी रोक शुक्रवार को बरकरार रखी। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में आकाश गौरव एवं अन्य, निरोज खेस एवं अन्य समेत कई याचिकाओं पर सुनवाई हुई। राज्य सरकार की ओर से शपथ पत्र दाखिल किया गया, जिस पर जवाब दाखिल करने के लिए प्रार्थियों ने समय मांगा। मामले की अगली सुनवाई सात अक्टूबर को होगी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि केवल एक अधिसूचना जारी कर स्थायी नियुक्ति पा चुके कर्मचारियों को नौकरी से नहीं हटाया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि अब तक सामने आए तथ्यों से प्रथमदृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि सभी नियुक्तियां पूरी तरह सही तरीके से नहीं हुई हैं, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सभी नियुक्तियों में गड़बड़ी हुई है।
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि जेपीएससी को एक परीक्षा आयोजित करने और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने में दो से तीन वर्ष तक का समय लग जाता है। ऐसे में एक साथ करीब 2,700 नियुक्तियां रद्द होने से बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों की नौकरी प्रभावित होगी। मामले की जांच की निगरानी के लिए अदालत ने झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश गौतम कुमार चौधरी को नियुक्त किया है। वहीं, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी आर.के. मल्लिक को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता श्रेय मिश्रा, इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने पक्ष रखा। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहिताश्य राय और वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने दलीलें दीं।

सरकार ने सीजीएल रद्द करने को उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बताया

राज्य सरकार ने अपने शपथ पत्र में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने के फैसले को उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बताया है। कार्मिक विभाग के संयुक्त सचिव अमर कुमार की ओर से दाखिल शपथ पत्र में कहा गया है कि सीजीएल की पूरी परीक्षा प्रक्रिया कथित अनियमितताओं के कारण दूषित हो गई थी। ऐसे में सही तरीके से परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले और अनुचित तरीके से लाभ पाने वाले अभ्यर्थियों के बीच अंतर कर पाना संभव नहीं था।
सरकार ने अपने पक्ष के समर्थन में उच्चतम न्यायालय के विभिन्न फैसलों और दिशा-निर्देशों का हवाला दिया है। शपथ पत्र में वानशिखा बनाम केंद्र सरकार मामले का भी उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यदि किसी परीक्षा की पूरी प्रक्रिया दूषित हो जाए और सही तथा गलत तरीके से चयनित अभ्यर्थियों के बीच अंतर करना संभव न हो तो पूरी परीक्षा रद्द की जा सकती है।
शपथ पत्र के अनुसार, सीजीएल परीक्षा से संबंधित गोपनीय कार्य आईसीएन टेक्नोलॉजी को दिया गया था। इसमें प्रश्नपत्रों की छपाई और उन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने समेत अन्य कार्य शामिल थे। सरकार ने बताया है कि सीजीएल परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में कंपनी के सीईओ सोमांश प्रकाश समेत 28 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और मामले की जांच जारी है। इस सिलसिले में 265 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। सरकार के अनुसार, जांच में परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी पर बड़े पैमाने पर अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। शपथ पत्र में कहा गया है कि पैसे लेकर अभ्यर्थियों को प्रश्नों के उत्तर रटाने और परीक्षा में अनुचित लाभ पहुंचाने से संबंधित तथ्य जांच में सामने आए हैं। सरकार ने नेपाल के अलावा आसनसोल, कोलकाता, बिहार, झरिया और बोकारो में ऐसे मामलों की जानकारी मिलने का दावा किया है। शपथ पत्र के मुताबिक, नेपाल में प्रश्नों के उत्तर रटाए गए 28 अभ्यर्थियों में से 10 सीजीएल परीक्षा में सफल हुए।
सरकार ने यह भी बताया कि सीजीएल में चयनित अभ्यर्थियों को जारी नियुक्ति पत्र में स्पष्ट किया गया था कि उनकी नियुक्ति सीआईडी जांच के परिणाम से प्रभावित होगी। सरकार के अनुसार, जांच में पूरी परीक्षा प्रक्रिया के दूषित होने के तथ्य सामने आने के बाद सही और गलत तरीके से चयनित अभ्यर्थियों के बीच अंतर करना मुश्किल पाया गया। इसके बाद मंत्रिमंडल ने परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया और उसी के आधार पर आदेश जारी किया गया।

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