अवैध खनन और तस्करी का नेटवर्क कमजोर होगा, तभी वैध खनन से राजस्व, रोजगार और विकास का रास्ता होगा मजबूत
रांची/हजारीबाग। झारखंड की पहचान उसकी खनिज संपदा के साथ देश की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए भी है। कोयला राज्य की प्रमुख प्राकृतिक संपदाओं में शामिल है। इसके वैध खनन से उद्योगों और बिजली उत्पादन को ऊर्जा मिलने के साथ सरकार को राजस्व, स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। लेकिन अवैध खनन, चोरी, भंडारण और परिवहन के जरिए कोयला बाजार तक पहुंचता है तो नुकसान पूरी अर्थव्यवस्था का होता है।
हजारीबाग, रामगढ़ और चतरा जैसे कोयला क्षेत्रों में अवैध खनन और तस्करी के खिलाफ कार्रवाई होती रही है। हाल में सीआईएसएफ की कार्रवाई ने इस मुद्दे को फिर केंद्र में ला दिया है। एमएमडीआर एक्ट के तहत नामित सीआईएसएफ अधिकारियों को मिले वैधानिक अधिकारों के बाद खुफिया सूचना के आधार पर अभियान तेज किए गए हैं। केंद्र सरकार के अनुसार, जुलाई 2026 में झारखंड और पश्चिम बंगाल के कोयला क्षेत्रों में चलाए गए अभियानों में 428.34 मीट्रिक टन अवैध कोयला बरामद किया गया। अगस्त में रामगढ़ के कुज्जू क्षेत्र में 866.152 मीट्रिक टन अवैध कोयला बरामद हुआ। हजारीबाग के बड़कागांव क्षेत्र में 26-27 अगस्त को चले अभियान में 256.71 टन से अधिक कोयला बरामद होने की जानकारी सामने आई। दुर्गम वन क्षेत्रों में ड्रोन सर्विलांस और बड़ी संख्या में जवानों की तैनाती बताती है कि अवैध कोयले का कारोबार अब भी गंभीर चुनौती है।
सवाल सिर्फ बरामद कोयले की मात्रा का नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क तक पहुंचने का है। अवैध कोयला कहां से निकाला जाता है, कहां जमा होता है, किस रास्ते से परिवहन किया जाता है और उसका खरीदार कौन है—इस पूरी श्रृंखला को तोड़ना जरूरी है। केवल जब्ती से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
अवैध कारोबार का सीधा नुकसान वैध खनन परियोजनाओं को भी होता है। विधिवत आवंटित कोयला ब्लॉकों में कंपनियों को भूमि, पर्यावरण, वन, पुनर्वास और सुरक्षा जैसी कई वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है। अवैध खनन करने वाला तंत्र इन लागतों से बचकर बाजार में कोयला उतारता है, जिससे वैध और अवैध व्यवस्था के बीच असमान प्रतिस्पर्धा पैदा होती है।
झारखंड में सीसीएल, एनएमडीसी और एनटीपीसी जैसी सरकारी संस्थाओं के अलावा जेएसडब्लू, अदाणी, रश्मि मेटालिक, डालमिया सीमेंट और हिंडाल्को समेत कई निजी कंपनियों को कोयला ब्लॉक मिले हैं। केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 37 वाणिज्यिक कोयला ब्लॉक आवंटित किए जा चुके हैं, लेकिन 2025-26 में इनसे उत्पादन सिर्फ 0.35 मिलियन टन रहा। इससे स्पष्ट है कि राज्य की बड़ी कोयला क्षमता अभी पूरी तरह उत्पादन में नहीं बदल पाई है। इसलिए अवैध खनन के खिलाफ लड़ाई को केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि राजस्व, निवेश, रोजगार और विकास से जुड़ा आर्थिक मुद्दा मानना होगा। राज्य सरकार को अवैध खनन के स्रोत, भंडारण और परिवहन की पूरी श्रृंखला पर कार्रवाई के साथ वैध परियोजनाओं के लिए प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी होगी।
