झारखण्ड के पहले और एक मात्र डीएम रुमेटोलाॅजिस्ट डाॅ. अवनीश झा ने ज्वाइन किया मेदांता हाॅस्पिटल, रांची, अब झारखण्ड के लोगों को गठिया के इलाज के लिए राज्य के बाहर नहीं जाना पड़ेगा
रांची, : झारखण्ड के पहले डीएम रुमेटोलाॅजिस्ट (गठिया रोग विशेषज्ञ) मेदांता अब्दुर रज़्ज़ाक अंसारी मेमोरियल वीवर्स हाॅस्पिटल, रांची के डाॅ. अवनीश झा ने कहा है कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) जब उसी शरीर के खिलाफ काम करने लगती है तो गठिया रोग की शुरुआत होती है। शुरुआती दौर में इलाज कराने से गठिया रोग पूर्णरूप से ठीक हो सकता है। दवाइयों से ही इसका इलाज किया जाता है। शरीर के जोड़ों में दर्द, सूजन, सुबह में जकड़न और अंगुलियों या जोड़ों में टेढ़ापन, कमर और गर्दन में दर्द गठिया के लक्षण हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि गठिया 50 से अधिक तरह के होते हैं। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ आॅस्टियो आर्थराइटिस, हाथ-पैर में दर्द तथा टेढ़ापन सबसे आम बीमारी है जिसे रुमोटायड गठिया कहा जाता है। इस गठिया में मरीज को धूम्रपान से पूर्णतः परहेज करना चाहिए। शराब का सेवन करने से गाउट गठिया की शुरुआत हो सकती है। गाउट में यूरिक एसिड बढ़ने से पैरों की मोटी अंगुलियों में सूजन, दर्द शुरू हो जाता है तथा चलने में काफी परेशानी होती है। डाॅ. झा के आने के बाद अब झारखण्ड के लोगों को गठिया के इलाज के लिए राज्य से बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
डाॅ. झा बताते हैं कि शुरुआती दौर में दवा से गठिया का इलाज हो जाने पर रिप्लेसमेंट की नौबत नहीं आती है। रिप्लेसमेंट तो अंतिम विकल्प है। उन्होंने कहा कि आॅटो इम्युन बीमारी से मांसपेशी टूटती है जिसे मायोसाटिस, खून की नलियों में सूजन जिसे वैसकुलाइटिस तथा कम उम्र की लड़कियों में चर्म रोग, बुखार आना, मुंह में छाला पड़ना, जोड़ों में दर्द, खून की कमी लूपस बीमारी के लक्षण होते हैं, का इलाज दवा से किया जाता है और वे ठीक हो सकते हैं।
डाॅ. झा ने हाल ही में रांची मेदांता हाॅस्पिटल ज्वाइन किया है। वे क्रिष्चियन मेडिकल काॅलेज, वेल्लोर, तमिलनाडु से एम.बी.बी.एस., एमडी तथा डीएम इन रुमेटोलाॅजी की डिग्री ले चुके हैं। वे 2022 से लेकर 2025 तक वहां पर एसोसिएट प्रोफेसर के अलावा कई पदों पर काम कर चुके हैं।
रांची मेदांता के हाॅस्पिटल डायरेक्टर श्री विश्वजीत कुमार ने कहा कि डाॅ. अवनीश झा के यहां आने से झारखण्ड के लोगों को गठिया रोग के इलाज के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। डाॅ. झा झारखण्ड के एक मात्र डीएम रुमेटोलाॅजिस्ट हैं। उन्होंने कहा कि झारखण्ड के लोगों को हर तरह का इलाज देने के लिए हमारा हाॅस्पिटल प्रबंधन प्रतिबद्ध है और इसी कड़ी में डाॅ. झा को यहां लाया गया है।
