जंजीरी मातम डेलीमार्केट के पास होगा: सैयद फ़राज़ अब्बास
रांची । हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) एवं कर्बला के शहीदों की याद में शिया समुदाय की ओर से चेहल्लुम का मातमी जुलूस मंगलवार, 4 अगस्त को राजधानी रांची में अकीदत के साथ निकाला जाएगा। यह जुलूस हर वर्ष मुहर्रम के 40 दिन बाद आयोजित किया जाता है। आयोजक सैयद फराज़ अब्बास के अनुसार, जुलूस प्रातः 11 बजे मेन रोड, विश्वकर्मा मंदिर लेन स्थित स्वर्गीय एडवोकेट सैयद यावर हुसैन के आवास अनवर आर्केड’ से प्रारंभ होगा। जुलूस मेन रोड, अंजुमन प्लाज़ा चौक, उर्दू लाइब्रेरी, डेली मार्केट, ओल्ड टैक्सी स्टैंड, गांधी चौक स्थित हनुमान मंदिर, काली मंदिर चौक, चर्च रोड, विक्रांत चौक एवं कर्बला चौक होते हुए कर्बला पहुंचेगा, जहां इसका समापन होगा।
जुलूस प्रारंभ होने से पूर्व अनवर आर्केड में मजलिस-ए-अरबईन का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के नोएडा से पधार रहे प्रसिद्ध धर्मगुरु मौलाना सैयद गुलाम अली नकवी विशेष संबोधन देंगे।
अपने संदेश में मौलाना सैयद गुलाम अली नकवी ने कहा कि कर्बला का पैगाम पूरी इंसानियत के लिए मोहब्बत, अमन, इंसाफ और भाईचारे का संदेश है। उन्होंने कहा कि जो इंसानों से नफरत करता है, वह इंसानियत की असल पहचान से दूर है। इंसानों से नफरत फैलाना और उनकी हत्या करना सबसे बड़ा आतंकवाद है। हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) ने अपने अमल से यह सिखाया कि सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए हर कुर्बानी दी जा सकती है, लेकिन अन्याय के सामने सिर नहीं झुकाया जा सकता। मजलिस में शायरों ने भी अपने कलाम के माध्यम से कर्बला के दर्द और हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) के घराने की अज़ीम कुर्बानियों को याद किया। शायर फरमान जांगीपुरीने पढ़ी- “झूला है खाली, आजाओ असगर, मां है सवाली, आजाओ असगर। वहीं शायर शबीह गोपालपुरी ने अपना कलाम पेश करते हुए कहा— “अरबईन करने आए हैं कर्बोबला, फिर भी सबके तसव्वुर में आशूर है।”
इन कलामों को सुनकर मजलिस में मौजूद अकीदतमंद ग़मगीन हो उठे और पूरे माहौल में अज़ादारी की कैफियत छा गई। चेहल्लुम के अवसर पर बड़ी संख्या में अकीदतमंदों के शामिल होने की संभावना है। जुलूस को लेकर प्रशासन द्वारा सुरक्षा एवं यातायात के आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं।
