रांची : जनवादी लेखक संघ (जलेस) रांची की आभासी बैठक आज संध्या 5 बजे कुमार बृजेंद्र की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में अपराजिता मिश्रा, वीना श्रीवास्तव, डॉ. किरण, डॉ. जमशेद कमर, सुधीर पाल, यास्मीन लाल, डॉ. रेहाना मो. अली, सुकेशी कर्मकार, विक्की मिंज, फिरदौस जहां, अमल आज़ाद, समीउल्लाह खान असदकी, मोईज उद्दीन मिरदाहा, रामदेव बड़ाइक, मो. इमरान एवं एम. जेड. ख़ान सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे। बैठक का संचालन करते हुए एम. जेड. ख़ान ने प्रत्येक माह रचना गोष्ठी आयोजित करने का प्रस्ताव रखा तथा 14 अप्रैल को आयोजित अंबेडकर जयंती एवं राहुल सांकृत्यायन की पुण्यतिथि कार्यक्रम की समीक्षा प्रस्तुत की। चर्चा में भाग लेते हुए वक्ताओं ने जलेस की गतिविधियों में निरंतरता बनाए रखने, नियमित रचना एवं वैचारिक गोष्ठियों के आयोजन तथा संगठन के वैचारिक विस्तार पर बल दिया।
डॉ. किरण ने कहा कि कार्यक्रम में निरंतरता जरूरी है जिसके लिए मासिक गोष्ठी का आयोजन किया जाना चाहिए। वीणा श्रीवास्तव ने प्रत्येक माह में एक कार्यक्रम के आयोजन पर जोर दिया एवं रचना गोष्ठी में परिचर्चा को भी शामिल करने का सुझाव दिया। सुधीर पाल ने कहा कि जलेस के कार्यक्रम में निरंतरता बरकरार रखते हुए, आगामी 30 मई को, भारतीय पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित हो तो बेहतर होगा।
कुमार बृजेंद्र रचना गोष्ठी के साथ वैचारिक गोष्ठी पर बल दिया और कहा कि आज कि लड़ाई विचारों की लड़ाई है। विचारों के माध्यम से आम लोगों तक अपनी पहुंच बनाई जा सकती है और संगठन को विस्तार भी दिया जा सकता है। डॉ जमशेद कमर ने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में वैचारिक गोष्ठी नितांत आवश्यक है, आज की पत्रकारिता पर गंभीर चर्चा कर लोगों के सामने सच लाने की अति आवश्यकता है हमे इसी संदर्भ में पत्रकारिता दिवस को लेना चाहिए। इस पर कुमार ब्रिजेन्द्र ने कहा कि 30 मई को हमे पत्रकारिता दिवस के अवसर पर “कल आज और कल : हिंदी पत्रकारिता” विषय के साथ पत्रकारिता दिवस मनाना चाहिए। डॉ आलम आरा ने कहा कि आज के माहौल में वैचारिक गोष्ठी का आयोजन बहुत जरूरी है, भारतीय एवं जनजातीय – क्षेत्रीय संगीत के साथ साथ लोक साहित्यों पर भी कार्यक्रम होना चाहिए। सुकेशी कर्मकार एवं यास्मीन लाल ने नियमित गोष्ठी आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। डॉ रेहाना मोहम्मद अली ने कहा कि होने वाले सभी कार्यक्रमों, गोष्ठियों एवं रचनाओं में समाज की बेहतरी की बात हो।
