रांची। विकसित भारत जी राम जी को लेकर रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने आज अपने केंद्रीय कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत की। इस बातचीत में श्री सेठ ने जी राम जी के विरोध करने पर कांग्रेस को आड़े हाथों भी लिया और इसकी विशेषताएं भी बताई। श्री सेठ ने कहा कि फर्जी जॉब कार्डधारी का नाम कटने के डर से कांग्रेस परेशान है जबकि जी राम जी मनरेगा की तुलना में श्रमिकों के लिए कई बेहतर सुविधाएं लेकर आई हैं। जिसमें सालभर में 125 दिन काम की गारंटी और अधिकतम 2 हफ्ते में मजदूरी भुगतान नहीं होने पर मुआवजे का प्रावधान है।
श्री सेठ ने कहा कि ग्राम स्वराज से अंत्योदय और विकसित भारत की दिशा में जी राम जी एक ऐतिहासिक कदम है, जिसके तहत विकसित भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी होगी। पूज्य महात्मा गांधी जी ने जिस ग्राम स्वराज का सपना देखा था, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने जिस अंत्योदय दर्शन की बात की थी, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने जिस विकसित भारत की बात की है; जी राम जी इन सब के दर्शन और दूरदर्शिता को एक साथ जोड़ने वाला है। जी राम जी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें योजनाओं का निर्माण स्थानीय स्तर पर होगा और उसका समन्वय राष्ट्रीय स्तर पर किया जाएगा। प्रत्येक ग्राम पंचायत अब अपनी आवश्यकताओं के अनुसार योजनाएं तैयार कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि अब विकसित भारत जी राम जी का उद्देश्य केवल योजना निर्माण तक सीमित नहीं है। यह ग्रामीण प्रशासन की सशक्तिकरण, योजना क्रियान्वयन में जवाबदेही और भ्रष्टाचार को कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। राज्य और पंचायत को भी अधिकार है कि वह स्थानीय महत्व और विकास की प्राथमिकता के साथ अनुसार योजनाओं को क्रियान्वित करें। जिससे ग्रामीण परियोजनाओं की गुणवत्ता, समय पर क्रियान्वयन और लक्ष्य प्राप्ति सुनिश्चित होगी। जी राम जी में ग्रामीण श्रमिकों को 1 साल में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई है। इसका भुगतान भी एक सप्ताह के अंदर करना सुनिश्चित किया गया है। अधिकतम दो सप्ताह में भुगतान नहीं होने पर मुआवजा का भी प्रावधान किया गया है। जबकि मनरेगा में साल भर में औसत रोजगार केवल 40 से 100 दिनों का था। जी राम जी केवल नाम का बदलाव नहीं है बल्कि यह ग्रामीण भारत को निर्माण और निर्णय लेने की वास्तविक शक्ति प्रदान करने वाला है। अब ग्राम पंचायत अपने गांव की प्राथमिकताओं और समस्याओं के अनुसार योजना बनाकर उन्हें क्रियान्वित कर सकती है। उनके कार्य का मूल्यांकन पूरी तरह से पारदर्शी होगा।
