नई दिल्ली। केंद्र सरकार के प्रस्तावित विद्युत संशोधन विधेयक 2025 के अनुसार राज्य सरकारें यदि विद्युत निजीकरण के लिए तैयार नहीं होती हैं। ऐसी स्थिति में उनकी केंद्रीय सहायता बंद कर दी जाएगी। 7 राज्यों के ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की बैठक,हाल ही में हुई है। जिसमें केंद्र सरकार ने निजीकरण की मंशा को स्पष्ट कर दिया है। राज्यों को विद्युत निजीकरण के लिए तीन विकल्प दिए गये हैं। यदि इन तीन विकल्पों को राज्य सरकारें स्वीकार नहीं करती है। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार की विद्युत में मिलने वाली केंद्रीय सहायता बंद कर दी जाएगी।
पहले विकल्प के रूप में राज्य सरकार को कहा गया है। वह निजी कंपनियों को 51 फीसदी हिस्सेदारी बेच दे। निजी भागीदार के साथ एक नई कंपनी तैयार करे। दूसरा विकल्प दिया गया है, सरकार 26 फीसदी हिस्सेदारी निजी कंपनी को बेचकर कंपनी का प्रबंधन निजी क्षेत्र को सौंप दे। राज्य सरकार को यदि दोनों मे से एक विकल्प स्वीकार है। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार 3।5 फीसदी ब्याज अनुदान और अगले 5 साल तक पूंजीगत खर्च के लिए आर्थिक मदद देगी। दोनों विकल्प स्वीकार नहीं होने की दशा में तीसरे विकल्प के रूप में राज्य सरकारों को कहा गया है। वह अपनी कंपनियों को शेयर एक्सचेंज में पंजीयन करायें।यदि ऐसा करेंगे, तो 5 साल तक टैक्स में राहत ओर लाभ का फायदा मिलेगा। केंद्र से अन्य कोई सहायता नहीं मिलेगी।
