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केंद्रीय गृह मंत्रालय और कोयला मंत्रालय है झारखंड में कोयला चोरी और सीसीएल अधिकारियों की घूसखोरी पर गंभीर
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मोहननगर के विस्थापितों समेत कई गांव के अधिकारों की लड़ाई बन गई वसूली का माध्यम
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टेरर फंडिंग की कड़ी अब राजधानी से जुड़ी..
डकरा और चूरी कोल डम्प कमिटी पर सफेदपोशों का संरक्षण सामने आ रहा है .चर्चा तेज है कि कुछ राजनैतिक दलों से जुड़े लोकल नेता जिस पार्टी से जुड़े हैं उस पार्टी के शीर्ष नेताओं को तो भनक तक नहीं लेकिन लोकल नेताओं के वारे न्यारे हैं. स्थानीय लोगों की माने तो हर माह 45 रुपए टन की वसूली की जा रही है. वसूली करने वाले लोग बताते हैं कि राजधानी से जुड़े नेताओं तक वसूली का माल पहुंचाया जाता है. एक पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष तक का नाम चर्चा में तेजी से आ रहा है.
विस्थापितों के नाम पर वसूली और टेरर फंडिंग
डकरा डंप की मांग कोयलांचल के लोग शुरुआती दिनों से की जा रही थी. उस समय एन के एरिया के सबसे बड़े आवासीय कॉलोनी मोहननगर के साथ साथ विस्थापन प्रभावित लोगों को रोजगार परक आयाम स्थापित करने के लिए यह कोल डम्प खोले गए. लेकिन कुछ सफेद पोश लोगों ने शुरुआती दिनों में मोहननगर के लोगों को आश्वस्त किया गया था कि उनके हित में काम होगा बाद में डंप के खुलने के बाद लोगों को नजरअंदाज किया गया.अपने सिस्टम में शामिल होते ही सफेद पोश लोगों ने किनारा कर लिए ..आज मोहन नगर के लोग अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं.
डकरा और चूरी कोल डम्प कमिटी में इनका नाम सुर्खियों में
डकरा कोल डम्प कमिटी में जहां भूषण यादव, रूबी यादव, भोला यादव, सुरेंद्र यादव और विजय यादव समेत अन्य के नाम शामिल हैं वहीं चूरी कोल डम्प कमिटी में नागेश्वर महतो, सुनील सिंह, सोनू पांडेय, अब्दुल्ला, लालेश्वर महतो और राजा खान समेत अन्य लोगों के नाम सामने आ रहे हैं. इनके पीछे कुछ सफेदपोश नेताओं के संरक्षण की बात है जो स्थानीय पुलिस से लेकर ऊपर तक के हुक्मरानों को मैनेज करने और रखने के नाम पर वसूली कर रहे हैं.
केंद्रीय गृह मंत्री और कोयला मंत्री की आंखों में धूल झोंक रहे सीसीएल के कुछ अधिकारी
केंद्रीय गृह मंत्री और कोयला मंत्री की आंखों में सीसीएल के कुछ अधिकारी धूल झोंक रहे हैं. लेकिन यह गोरखधंधा आखिर कब तक चलेगा. केंद्र सरकार कोयला चोरी और टेरर फंडिंग को रोकने के लिए Zero Coal Leakage Plan तैयार कर रही है. अब गृह मंत्रालय खुद अवैध कोयला खनन और कोयला से हो रहे टेरर फंडिंग और घूसखोरी से संबंधित गतिविधियों की समीक्षा करेगी. जल्द ही इस मामले में एक बार फिर NIA और इस बार ED भी कोयले से जुड़े अवैध कारोबार पर शिकंजा कसेगी. सोमवार को दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय बैठक में केंद्रीय गृह सचिव, कोयला सचिव, कोयला मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, CISF, कोल इंडिया लिमिटेड और BCCL के अधिकारियों ने कई अहम निर्णय लिए हैं.
