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23 जून को हुई बीडिंग में डकरा से 10000 टन, पूर्णाडीह से 5000 टन, रोहिणी से 5000 टन कोयला का होगा उठाव
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रैयत विस्थापित समिति और कोल डम्प कमिटी की आड़ में फंडिंग के लिए शुरू हुई टेरर फैलाने की रणनीति
सीसीएल ने तमाम खबरों के बीच एक बार फिर 23 जून को कोयले के उठाव के लिए बीडिंग करवाई. इस बीडिंग में कोयला कारोबारियों ने बीडिंग की और तय रेट के अनुसार रांची के खलारी थानाक्षेत्र स्थित डकरा कोलियरी से 10000 टन और खलारी थानाक्षेत्र के ही रोहिणी कोलियरी से 5000 टन कोयले का उठाव किया जाना है. वहीं चतरा के पिपरवार थानाक्षेत्र स्थित पूर्णाडीह से 5000 टन कोयला का उठाव होगा. इसके अलावा कथारा वाशरी से 5000 टन कोयला का होगा उठाव होना तय हो गया है. यह बीडिंग रोड सेल के लिए की गई है इसलिए कोयला कंपनियों के एजेंट अब ट्रांसपोर्टर्स की तलाश कर रहे हैं. लेकिन आपको जानकर हैरत होगी कि इन इलाकों में ट्रांसपोर्टिंग करने के लिए भी चंद लोग ही चयनित हैं जो रैयत विस्थापित कमिटी, कॉल डंप कमिटी, स्थानीय पुलिस प्रशासन और सीसीएल के पदाधिकारियों की छत्रछाया में ट्रांसपोर्टिंग का काम कर सकते हैं. और बस यहीं से शुरुआत होती है टेरर फंडिंग के लिए रणनीति बनाने की ताकि दहशत के नाम पर सबकी जेब भर दी जाए.

रोहिणी में मुकद्दर, अमृत भोक्ता, और जालिम सिंह तो डकरा में भूषण यादव, रूबी यादव, भोला यादव, सुरेंद्र यादव ने संभाली कमान
कोयला कंपनियों के लिए काम करने वाले एजेंट ऐसे ट्रांसपोर्टर्स की तलाश करते हैं जो इन कोलियरी से कोयला की ट्रांसपोर्टिंग करने में माहिर माने जाते हैं. कोई अन्य ट्रांसपोर्टर अगर इन कोलियरी में दूसरे ट्रांसपोर्टर से कम रेट पर भी काम करना चाहे तो उसे पहले धमकियां दी जाती हैं, फिर हमला तक करवा दिया जाता है ताकि इन कोलियरी क्षेत्र में बस वही ट्रांसपोर्टर काम कर सके जो तय रेट पर रैयत विस्थापित कमिटी, कोल डम्प कमिटी, पुलिस प्रशासन और सीसीएल अधिकारियों को मैनेज कर समय पर भुगतान कर दे. मतलब ट्रांसपोर्टर से लेकर तमाम माफियाओं ने एक पूरा सिंडीकेट बना रखा है.रोहिणी कोलियरी से उठने वाले कोयले में रैयतों और कोल डम्प कमिटी का नाम से रुपया उठाने वालों में मुकद्दर, अमृत भोक्ता और जालिम सिंह का नाम सामने आया है तो वहीं डकरा में भूषण यादव, रूबी यादव, भोला यादव, सुरेंद्र यादव ने कमान संभाल लिया है.

कई ट्रांसपोर्टर्स NIA की रडार पर, जेल से निकल कर फिर करने लगे खेल
सबसे गंभीर मामला यह है कि इन इलाकों में ज्यादातर ट्रांसपोर्टर्स वही पुराने हैं जिन्हें NIA ने टेरर फंडिंग के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा था. यह ट्रांसपोर्टर्स जेल से निकलने के बाद एक बार फिर उन्हीं इलाकों में पैठ जमा चुके हैं और हजारों करोड़ के कोयले का काम कर टेरर फंडिंग को और मजबूत कर रहे हैं. कहीं कुछ नहीं बदला बस रैयत विस्थापित मोर्चा और कोल डम्प कमिटी की आड़ में नए चेहरों ने कमान संभाल ली है. वहीं कुछ पुराने कोयला कारोबारी खिलाड़ी निकले हैं जो सीधे NIA के गवाह बन गए हैं.

रोहिणी कोलियरी के PO दीपक कुमार से त्रस्त हैं कोयला कामगार
रोहिणी कोलियरी के PO दीपक कुमार से वहां के कोयला कामगार भी परेशान हैं. इनके में चर्चा है किसी भी तरह का काम दीपक कुमार को बिना चढ़ावा चढ़ाए नहीं होता है. दीपक कुमार की नजदीकियां रैयत विस्थापित मोर्चा और कोल डम्प कमिटी के लोगों से भी है जिनपर पूर्व से लेकर अभी तक कई बार टेरर फंडिंग का आरोप लग चुका है.
