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कोल डम्प कमिटी के नाम पर डकरा में अवैध वसूली, खराब सीजन में 16 लाख प्रतिदिन जबकि पिक सीजन में 80 लाख से ज्यादा की टेरर फंडिंग
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भूषण यादव, रूबि यादव, सुरेंद्र यादव, भोला यादव, विजय यादव समेत कई नाम सुर्खियों में
टेरर फंडिंग…मतलब दहशत दिखाकर रुपयों की अवैध वसूली और फिर उन रुपयों का इस्तेमाल नक्सल संगठन, सीसीएल अधिकारी और विस्थापित मोर्चा के साथ साथ डंप कमिटी के तथाकथित नेताओं की संपत्ति में लगातार वृद्धि. NIA की दबिश और जांच के बाद तरीके जरूर बदल दिए गए लेकिन वसूली के काले खेल में कोई अंतर नहीं आया. हैरानी की बात यह है कि स्थानीय सीसीएल अधिकारियों को हर बात की जानकारी है लेकिन उसके बावजूद ना तो सीसीएल मुख्यालय को सूचना दी जाती है ना ही CISF कोई एक्शन प्लान करता है. सीसीएल के एक रिटायर अधिकारी का कहना है कि वसूली का यह रुपया ऊपर तक पहुंचाया जाता है इसलिए मामले में लीपापोती कर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है. बदनाम केवल पुलिस होती है जबकि इस हमाम में सभी नंगे हैं.
पूर्णाडीह, डकरा, रोहिणी, अशोका, चूरी, केडीएच और पिपरवार का काला सच
पिपरवार थानाक्षेत्र चल रहे पूर्णाडीह कोलियरी का काला सच आप सभी के सामने है. बीगन भोक्ता, नरेश गंझू और विनय खलखो का नाम सुर्खियों में है इस परियोजना से अवैध वसूली के लिए लेकिन इसके अलावा भी कई सफेदपोश हैं जो अलग अलग परियोजनाओं में अलग अलग तरीके से वसूली कर रहे हैं.पूर्णाडीह के साथ साथ डकरा, रोहिणी, अशोका, चूरी, केडीएच और पिपरवार में जबरदस्त वसूली चल रही है. रांची और चतरा में जिले में चलने वाले इन परियोजनाओं से आतंक की दरख्तों को और मजबूत किया जा रहा है.
डकरा में भूषण यादव, रूबी यादव, सुरेंद्र यादव, भोला यादव समेत कई सफेदपोश हावी
रांची के खलारी थानाक्षेत्र स्थित डकरा कोलियरी में कोल डम्प कमिटी ने नाम पर अवैध वसूली का खुला खेल चल रहा है. इस डंप कमिटी का अध्यक्ष भूषण यादव है और उसके साथ रूबी यादव, भोला यादव, सुरेंद्र यादव, विजय यादव समेत अन्य लोग शामिल हैं जो सिंडीकेट बनाकर पूरा खेल चला रहे हैं. रूबी यादव को एसटीएफ ने पूछताछ के लिए उठाया था जिसमें उसने कई जानकारियां पुलिस को दी थीं.
स्पेशल लोडिंग का 8500 रुपयों का टोकन बना टेरर फंडिंग का साधन
डकरा में कोल डम्प कमिटी स्पेशल लोडिंग के नाम पर अवैध वसूली कर रही है. लोडर के नाम से एक टोकन काटा जाता है जिसकी कीमत 8500 रुपए प्रति गाड़ी है. इस टोकन को स्पेशल लोडिंग का नाम दिया गया है. जब किसी कारोबारी का कोयला उठाव होता है तो उसे ग्रेड 1 का बेहतरीन कोयला देने के लिए यह उगाही की जाती है. इसे लोडिंग चार्ज के रूप में दिखाकर मामला सलटाया जाता है.
कोल डम्प कमिटी का 260 रुपए अलग से प्रति टन रेट फिक्स
स्पेशल लोडिंग के अलावा कोल डम्प कमिटी के नाम से 260 रुपयों की वसूली की जाती है. जानकारों की मानें तो इसमें 10 रुपए टन स्थानीय पुलिस को और 30 रुपए टन सीसीएल अधिकारियों के हिस्से में भी जाता है. बाकी बचा रुपया नक्सलियों और नेताओं के बीच बांट दिया जाता है.
खराब सीजन में प्रतिदिन 100 गाड़ियां, 16 लाख और पिक सीजन में 500 से ज्यादा गाड़ियां 80 लाख की वसूली
क्षेत्र के स्थानीय लोगों का कहना है बरसात में जब मार्केट डाउन रहता है तब भी केवल डकरा कोलियरी में 100 से अधिक गाड़ियां लगती हैं. मतलब 8500 रुपए प्रति गाड़ी के हिसाब से 8 लाख 50 हजार रुपयों का स्पेशल लोडिंग टोकन काटकर अवैध वसूली की जाती है. इसके अलावा 100 गाड़ियों में कम से कम 3000 टन कोयला उठाव होता है तब 260 रुपए प्रति टन के हिसाब से 7 लाख 80 हजार की लिया जाता है. इस लोडिंग में स्थानीय लोगों को कम जबकि इन तथाकथित नेताओं के पेलोडर गाड़ियों से लोडिंग की जाती है. खराब सीजन में भी प्रति दिन करीब 16 लाख से ज्यादा वसूली टेरर फंडिंग के लिए किया जा रहा है. सीजन पिक पर हो और प्रतिदिन 500 गाड़ियां जब लगती हैं तब यही रखम बढ़कर 80 लाख रुपए प्रतिदिन की वसूली होती है.
कमिटी के नाम पर नेतागिरी करने वाले लोग कर रहे बेनामी निवेश
कमिटी के नाम पर नेतागिरी करने वाले लोगों ने बेनामी निवेश के लिए कई लोगों को रखा हुआ है. इन नेताओं की।संपत्ति की NIA या ED जांच कर ले तब राज्य का सबसे बड़ा वसूली नेटवर्क का खुलासा होगा. बेनामी निवेश में अरविन्द सिंह, अखिलेश, लड्डू समेत कई नाम चर्चा में हैं.
