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आखिरकार ग्रामसभा भिट्ठा ने जताया विरोध…अब सड़क पर आंदोलन की तैयारी
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भिट्ठा और चंदवे की अधिकांश आदिवासी जमीनों पर हो चुका है अवैध कब्जा
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रांची डीसी को लिखित शिकायत..मंत्री से मिलने नहीं देते पदाधिकारी
भू राजस्व मंत्री दीपक बिरुआ से गरीब आदिवासियों को मिलने तक नहीं दिया जा रहा. कई बार कोशिश की गई कि लिखित शिकायत मंत्री जी को दी जाए लेकिन कांके रोड के भिट्ठा और चंदवे मौजा के पीड़ित आदिवासी अपने मंत्री से मिल तक नहीं पा रहे. हारकर अबुआ राज के राजधानी के आदिवासियों को ग्रामसभा के माध्यम से रांची डीसी मंजुनाथ भजंत्री से लिखित शिकायत करनी पड़ी. इस शिकायत पर अधिकारियों का रवैया पूरी तरह उदासीन है और प्रयास किया जा रहा है कि शिकायतकर्ताओं को ही दबाकर, डरा धमकाकर शिकायत वापस करवा ली जाए.

भिट्ठा में बसा दिया जगतपुरम और चंदवे में ब्रह्मचारीनगर
सीएम हाउस से महज 3 किमी से भी कम दूरी पर बसा भिट्ठा मौजा जहां अपना अस्तित्व खोकर अब जगतपुरम कहला रहा है वहीं चंदवे मौजा को ब्रह्मचारी नगर का नाम देकर जमीन माफिया कब्जा करते जा रहे हैं. स्थानीय लोग आक्रोशित हैं लेकिन माफियाओं की दहशत और स्थानीय कांके थाना पुलिस व कांके, हेहल अंचल की कार्यशैली के कारण कलेजे पर पत्थर रख अपनी जमीन को लुटता हुआ देख रहे हैं. उन्हें इंतजार है कि एक दिन आएगा जब मंत्री दीपक बिरुआ उसी इलाके में जनता दरबार लगा देंगे और जमीन घोटाला की सबसे बड़ी साजिश का भंडाफोड़ होगा.
जगतपुरम और ब्रह्मचारी नगर में भूइंहरी, मुंडई, नौकराना जमीन तक बेच दिया दलालों ने
ग्रामसभा भिट्ठा की लिखित शिकायत में साफ खुलासा हुआ है कि जगतपुरम (भिट्ठा) की आदिवासी भुईहरि , मुंडाई, नौकरानी समेत अन्य रैयतों की जमीन धड़ल्ले से दलालों के द्वारा बेची जा रही है. स्थानीय लोग और ग्रामसभा लगभग दो साल से इसपर लगाम लगाने का प्रयास कर रही है लेकिन माफिया और प्रशासन गठजोड़ के कारण आदिवासी बेहाल होते जा रहे हैं.

कौड़ियों के दाम पर खरीद रहे आदिवासियों से जमीन, बेच रहे जाली दस्तावेज बनाकर, कौन करेगा शिकायत?
दरअसल मंत्री दीपक बिरुआ जी भी लाचार हो जा रहे हैं माफियाओं और जमीन दलालों के सामने. जमीन के इस लूट की शिकायत ही उन तक नहीं पहुंचने दी जाती है. आदिवासियों से जमीन दलाल औने पौने दाम पर आदिवासियों की जमीन का एकरारनामा कर उनके बैंक खाते में रुपया डालते हैं और बाद में इसी जमीन का जाली दस्तावेज बनाकर गैरआदिवासियों को करोड़ों रुपयों में बेचते हैं. पीड़ित आदिवासी जब शिकायत दर्ज कराने की बात कहते हैं तो उनको बैंक खाता और पुलिस का खौफ दिखाकर धमकाया जाता है कि शिकायत की तो जेल भेज दिए जाओगे. अब मंत्री जी तक पीड़ित आदिवासियों की शिकायत पहुंचे तो कैसे पहुंचे.
