रांची। झारखंड में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष और विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी लगातार राज्य सरकार को निशाने पर ले रहे हैं। बुधवार को भी उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में टेंडर प्रक्रिया में हुई अनियमितता को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है।
बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में कहा है कि स्वास्थ्य विभाग की टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के साक्ष्य मिले हैं। उपलब्ध रिकॉर्ड और सार्वजनिक दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि सुनियोजित ढंग से प्रतिस्पर्धा को सीमित कर कुछ खास चुनिंदा लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि शासन की पारदर्शिता और संवैधानिक सिद्धांतों पर भी गहरा सवाल खड़ा करता है। इसलिए इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच आवश्यक है।
एक ही परिवार की तीन कंपनियांनेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एक ही परिवार ने एक ही पते पर तीन कंपनियां बनाकर पूरे घोटाले को अंजाम दिया। पूरे झारखंड में 11 जिलों के 11 टेंडरों को मैनेज करना केवल तभी संभव है, जब यह पूरा खेल स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के संरक्षण में हुआ हो। उन्होंने कहा कि जेम पोर्टल की प्रक्रिया के क्लाउज 29 के अनुसार यदि एक व्यक्ति दो या उससे अधिक कंपनियां बनाकर बिडिंग में हिस्सा लेता है, तो तकनीकी जांच के दौरान ही उसका टेंडर स्वतः निरस्त कर दिया जाना चाहिए, लेकिन यहां तो नियमों को उलटकर अयोग्य कंपनियों को ही योग्य घोषित कर भारी संख्या में टेंडर अवार्ड कर दिया गया। इतने बड़े पैमाने पर यह गोरखधंधा बिना मंत्री के संरक्षण के संभव ही नहीं है। मंत्री इरफान अंसारी ने न केवल अपने विभाग में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया, बल्कि जानबूझकर अपने खास लोगों को टेंडर बांटे।
उन्होंने कहा कि उपरोक्त तीनों कंपनियां मात्र शेल कंपनियां हैं, जो सिर्फ दिखावे के लिए बनाई गई हैं। वास्तविक लाभार्थी स्वास्थ्य मंत्री से सीधे जुड़े कुछ दूसरे प्रभावशाली लोग हैं। ऐसे में प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) करा कर मुख्यमंत्री पूरे प्रकरण की उच्च-स्तरीय निष्पक्ष जांच कराएं और दोषी पाये जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें।
