कांके विधायक सुरेश बैठा जी ..आखिर कब रोकियेगा इलाके के जमीन दलालों को.
झारखंड हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश संख्या WP (c) 2576/2008 का हवाला दे रहे रजिस्ट्रार
Government pleader (सरकारी वकील) से मांगे गए ओपिनियन के आधार पर कर दी गई रजिस्ट्री.
जगतपुरम की आदिवासी जमीनों की रजिस्ट्री गैर आदिवासियों के नाम से की जा रही है. वार्ड 1 में स्थित जगतपुरम की बेशकीमती जमीनों को इलाके के जमीन दलाल आदिवासी जमीन मालिकों से औने पौने दाम में खरीद रहे हैं और करीब 20 लाख रुपये डिसमिल की रेट से बेच रहे हैं. झारखंड का यह शायद पहला मामला होगा जब एक आदिवासी जमीन मालिक से सीधे गैर आदिवासी को जमीन की।रजिस्ट्री कर दी गई है. इस पूरे खेल में रांची रजिस्ट्रार दिलीप कुमार सिंह और जमीन दलालों की सांठगांठ की बात सामने आ रही है.
*वार्ड नम्बर 1 में लागू नहीं होता CNT ACT ?*
कांके रोड के वार्ड नम्बर 1 की आदिवासियों की जमीन को आदिवासी जमीन मालिक के द्वारा ही सीधे गैर आदिवासियों के नाम से रजिस्ट्री किया जा रहा है. रांची रजिस्ट्री ऑफिस के रजिस्ट्रार दिलीप कुमार सिंह पर जमीन दलालों के साथ सांठ गांठ कर इस जमीन की रजिस्ट्री करने का मामला तेज हो गया है. इस रजिस्ट्री के लिए रजिस्ट्रार दिलीप कुमार सिंह ने झारखंड हाई कोर्ट द्वारा पारित आदेश संख्या wp (c) 2576/2008 से जुड़े आदेश का हवाला देते हुए पहले Government pleader यानी सरकारी वकील से लीगल ओपिनियन मांगी जिसके बाद जमीन की रजिस्ट्री की गई. रजिस्ट्री ऑफिस के द्वारा सरकारी वकील को भेजे गये पत्र में यह उल्लेख किया गया है है कि वार्ड नम्बर 1 की आदिवासी जमीनों पर जिनका नगर निगम से होल्डिंग किया गया है उसपर CNT की धाराएं प्रभावी नहीं होतीं.
*सरकारी वकील के ओपिनियन पर भी उठने लगे सवाल*
रजिस्ट्री डीड में लगाए गए दस्तावेजों के अनुसार रजिस्ट्री ऑफिस के द्वारा मांगे गए ओपिनियन पर सरकारी वकील हृदय नाथ विश्वकर्मा के द्वारा लेटर संख्या 15 दिनांक 06 मार्च 2026 को जारी किया गया जिसके आधार पर आदिवासियों की जमीन सीधे गैर आदिवासियों को रजिस्ट्री कर दी गई. लेकिन झारखंड डिजिटल की टीम ने जब Government pleader से इस मामले पर फोन से बात की तब उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट का ऐसा कोई आदेश उनकी जानकारी में नहीं जिसके अनुसार आदिवासी की जमीन सीधे गैर आदिवासी को रजिस्ट्री कर दी जाए. अब सवाल यह है कि क्या रजिस्ट्री के लिए लगाए गए Government pleader हृदय नाथ विश्वकर्मा के ओपिनियन से जुड़े दस्तावेज फर्जी हैं. ऐसे में गम्भीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया जा सकता है.
*सोशल मीडिया पर भूचाल*
इस मामले की जानकारी के बाद सोशल मीडिया फेसबुक ट्विटर पर भूचाल आ गया है. सीएम हेमंत सोरेन समेत कई बड़े नेताओं को झारखंड की जनता खबर को ट्वीट कर इंसाफ की मांग कर रही है. हालांकि जमीन दलालों और रजिस्ट्रार दिलीप सिंह के करीबियों का कहना है कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता. उनलोगों की पहुंच सत्ता के गलियारे से लेकर दिल्ली तक है.
