8 नवंबर को मनाई जाएगी दीपावली, घर-घर में होगी मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना
रांची : विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि दीपावली भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म का एक अत्यंत पवित्र, लोकप्रिय और उल्लासपूर्ण पर्व है। यह महापर्व अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य तथा अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। प्रकाश, ज्ञान, आशा और सकारात्मकता का संदेश देने वाला दीपावली का त्योहार प्रतिवर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को पूरे देश में श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष दीपावली 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि दीपावली के अवसर पर घरों, मंदिरों, प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक स्थलों को दीपों, रंगोली तथा आकर्षक विद्युत सज्जा से सजाया जाता है। यह पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय परंपरा, सामाजिक समरसता और पारिवारिक एकता का भी प्रतीक है।
भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन से जुड़ी है परंपरा
संजय सर्राफ ने कहा कि दीपावली मनाने के पीछे अनेक धार्मिक, ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताएं प्रचलित हैं। सबसे प्रसिद्ध मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम चौदह वर्षों का वनवास पूर्ण कर रावण का वध करने के बाद माता सीता और अनुज लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। उनके आगमन की खुशी में अयोध्यावासियों ने घी के दीप जलाकर पूरी नगरी को रोशनी से जगमगा दिया था। तभी से दीपावली भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन और धर्म की विजय के प्रतीक के रूप में मनाई जाती है।
उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक अमावस्या के दिन माता लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। इसी कारण दीपावली पर धन, वैभव और समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी तथा विघ्नहर्ता भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि विधि-विधान और श्रद्धापूर्वक पूजन करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। इसी दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार और राजा बलि से जुड़ी मान्यताएं भी प्रचलित हैं।
पूजा-अर्चना और दीपों से जगमगाते हैं घर-आंगन
दीपावली के दिन लोग सुबह घरों की साफ-सफाई कर शाम को शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, माता सरस्वती और कुबेर की पूजा-अर्चना करते हैं। घरों के मुख्य द्वार पर आकर्षक रंगोली बनाई जाती है तथा दीप प्रज्वलित कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की जाती है। मिठाइयों एवं उपहारों का आदान-प्रदान कर लोग एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा करते हैं। वहीं, व्यापारी वर्ग नए बही-खातों का शुभारंभ कर अपने प्रतिष्ठानों में विशेष पूजा करता है।
पर्यावरण संरक्षण और मानव सेवा का भी दें संदेश
संजय सर्राफ ने कहा कि दीपावली केवल बाहरी रोशनी का उत्सव नहीं, बल्कि अपने अंतर्मन में ज्ञान, विवेक और सद्भाव का दीप जलाने का अवसर है। यह पर्व हमें अपने भीतर के अज्ञान, अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष और नकारात्मकता को समाप्त कर प्रेम, सद्भाव और सकारात्मकता अपनाने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने सभी लोगों से अपील की कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्रदूषणमुक्त एवं सुरक्षित दीपावली मनाएं। मिट्टी के दीप जलाएं, स्वदेशी वस्तुओं को प्रोत्साहित करें तथा जरूरतमंदों के साथ खुशियां बांटें।
अंत में संजय सर्राफ ने कहा कि दीपावली हमें प्रेम, करुणा, भाईचारे, सामाजिक एकता और मानव सेवा का मार्ग दिखाती है। हमें इस पावन अवसर पर संकल्प लेना चाहिए कि अपने जीवन और समाज को ज्ञान, संस्कार, सद्भाव तथा सेवा के प्रकाश से आलोकित करेंगे। यही दीपावली का वास्तविक उद्देश्य और सार्थक संदेश है।
